Betul News: कोथलकुंड टोल पर दो कानून, बैतूल के वाहन मुफ्त, बाहर वालों से वसूली

ठेका खत्म या जारी? टोल पर वसूली ने खड़े किए गंभीर सवाल
Betul News: बैतूल। जिले की सीमा पर टोल वसूली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बैतूल-परतवाड़ा मार्ग पर संचालित कोथलकुंड टोल नाके पर स्थानीय और बाहरी वाहनों के लिए अलग-अलग नियम लागू होने से कथित तौर पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
बैतूल से महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को टोल से मुक्त रखा गया है, जबकि दूसरे जिलों से आने-जाने वाले वाहनों से बाकायदा टोल वसूली की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह व्यवस्था किस नियम और किस अनुबंध के तहत संचालित हो रही है? सूत्रों के मुताबिक टोल का ठेका लेने वाली कंपनी के मुताबिक उसका अनुबंध अक्टूबर की 10 से 15 तारीख के बीच समाप्त होगा।
सूत्रों का दावा है कि एमपीआरडीसी से अनुबंध के अनुसार ठेके की अवधि 31 अगस्त की रात 12 बजे तक ही निर्धारित थी। यदि यह दावा सही है तो 1 सितंबर से आगे टोल संचालन का आधार क्या है? क्या कंपनी को लिखित रूप से डेढ़ माह का एक्सटेंशन दिया है या फिर बिना स्पष्ट अनुमति के वसूली जारी है?
यह जांच का गंभीर विषय है। कोथलकुंड टोल पर स्थानीय वाहनों को फ्री किए जाने का दावा महज मौखिक नहीं बताया जा रहा। टोल पर फ्री चलने वाले वाहनों के पंजीयन नंबर सहित सूची उपलब्ध होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर दूसरे जिलों के वाहन चालकों से निर्धारित दरों पर वसूली की जा रही है। इससे व्यवस्था में कथित दोहरे मापदंड को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
टोल मैनेजर का तर्क भी खड़े कर रहा सवाल
मामले में टोल मैनेजर उपेंद्र तिवारी से भी चर्चा की गई उनका कहना है कि लोकल वाहनों को टोल फ्री किया गया है और अन्य वाहनों से टोल लिया जा रहा है। उनका तर्क है कि बैतूल-परतवाड़ा सड़क की स्थिति खराब होने के कारण स्थानीय वाहनों से टोल नहीं लिया जा रहा, लेकिन सवाल यह है कि यदि अनुबंध सभी वाहनों से टोल वसूली का है तो बीच में स्थानीय वाहनों को किस आधार पर छूट दी गई?
नुकसान में टोल संचालन या नियमों की अनदेखी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बड़ी संख्या में स्थानीय वाहनों से टोल नहीं लिया जा रहा है तो कंपनी कथित तौर पर नुकसान झेलकर टोल संचालन क्यों कर रही है? क्या इसके पीछे कोई अलग गणित या गहरा राज है?
अनुबंध समाप्त होने की तारीख और वास्तविक वसूली की अवधि के बीच उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है क्योंकि यह लाखों नहीं बल्कि करोड़ो रुपयों की वसूली का मामला है।
बाहरी वाहन चालकों ने इस व्यवस्था को दोहरा मापदंड बताते जबरन वसूली का आरोप लगाया है। अब पूरे मामले में एमपीआरडीसी को अनुबंध, एक्सटेंशन आदेश, टोल दरों और स्थानीय वाहनों को दी छूट की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आखिर टोल वसूली वैध है तो नियम सभी वाहनों के लिए समान क्यों नहीं?
इनका कहना…
सड़क खराब होने की वजह से लोकल वाहनों से टोल नहीं लिया जा रहा है। कम्पनी को नुकसान तो उठाना पड़ रहा है, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।
उपेंद्र तिवारी, टोल मैनेजर, कोथलकुंड
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