Betul News: कलेक्टर अध्यक्ष, फिर भी रजिस्ट्री कार्यालय की शिकायतों पर जांच क्यों नहीं?

सांझवीर की खबर के बाद एक रजिस्ट्री की फाइल तलब, सबूत सौंपे जाने के बाद भी एक सप्ताह से कार्रवाई का इंतजार
Betul News: बैतूल। जिला पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर सामने आ रहे कथित अनियमितताओं के मामले में अब सवाल सीधे जिला मूल्यांकन समिति की निगरानी व्यवस्था पर उठने लगे हैं। खास बात यह है कि जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं और रजिस्ट्री कार्यालय नए कलेक्ट्रेट भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित है। बावजूद कार्यालय में चल रही शिकायतों की स्थिति जानने के लिए अब तक कोई औचक निरीक्षण सामने नहीं आया है।
सांझवीर टाईम्स की सिलसिलेवार खबरों के बाद कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने एक रजिस्ट्री में आधार कार्ड और खसरे में अलग-अलग नाम होने के मामले की फाइल तलब की थी। कलेक्टर ने मामले की जांच कराने की बात भी कही थी। इसके बाद संबंधित मामले के पुख्ता दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन करीब एक सप्ताह बीतने के बाद भी जांच की कार्रवाई सामने नहीं आई है।
रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े कुछ सर्विस प्रोवाइडरों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया है कि रजिस्ट्री के नाम पर अलग से ली जाने वाली राशि में छोटे नोट स्वीकार करने को लेकर भी कथित दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि कई मामलों में 100 और 200 रुपए के नोट लेने पर कथित तौर पर आपत्ति की जाती है और केवल 500 रुपए के नोटों में राशि लेने का दबाव रहता है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह महज लेनदेन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि कार्यालय में काम कराने की प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
- Also Read : Betul Samachar : बौद्ध भिक्षु बनकर 8 साल से आमला में रह रहा था संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक
हर रजिस्ट्री पर अतिरिक्त राशि के आरोप
सर्विस प्रोवाइडरों का आरोप है कि रजिस्ट्री से जुड़े कामकाज के दौरान निर्धारित शुल्क के अलावा अतिरिक्त राशि की मांग को लेकर दबाव रहता है। जिले में बड़ी संख्या में मकान, दुकान, आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की रजिस्ट्री होती है। ऐसे में यदि प्रत्येक दस्तावेज पर अतिरिक्त राशि लिए जाने की शिकायतें सही हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।
फाइल तलब करने के बाद कार्रवाई का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत के साथ दस्तावेज कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुके हैं और एक मामले की फाइल भी तलब की जा चुकी है, तो जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी? क्या मामले की जांच के लिए कोई अधिकारी या समिति तय की गई है? क्या रजिस्ट्री कार्यालय की कार्यप्रणाली का औचक निरीक्षण होगा? इन सवालों के जवाब अब लोगों को प्रशासन से अपेक्षित हैं।
निष्पक्ष जांच से ही साफ होगी वास्तविकता
सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि जिला प्रशासन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए, संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्री प्रक्रिया की जांच करे तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
वहीं संबंधित अधिकारियों और सर्विस प्रोवाइडरों, पीड़ितों का पक्ष भी जांच में सामने आना आवश्यक है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इस संबंध में जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर सोनवणे को उनके मोबाइल नंबर 7701071112 पर काल किया, लेकिन आमला के कार्यक्रम के कारण व्यस्त होने के कारण चर्चा नहीं हो सकी।
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें
👇https://chat.whatsapp.com/KWRuTRhIWoXDiwhdwiCm29?mode=gi_t
बैतूल जिले की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending और Viral खबरों के लिए जुड़े रहे snewstimes.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें snewstimes.com




