FIR against Patwaris : वर्षों से दबा था जमीन खरीद का मामला, पटवारियों के निलंबन के बाद एफआईआर की चर्चा

FIR against Patwaris :  आमला। शासकीय नियमों की अनदेखी कर रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदने के मामले में आमला तहसील के चार पटवारियों के निलंबन के बाद अब इस प्रकरण को लेकर कई नए सवाल सामने आ रहे हैं। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने पटवारी आनंदराव मोहबे, सुरेंद्र मस्की, नितेश पवार और सागर राठौर को निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की जांच में आमला मेन रोड की व्यावसायिक भूमि को आवश्यक अनुमति के बिना आवासीय प्रयोजन के लिए डायवर्ट करने और रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदने की बात सामने आई है। इससे शासन को स्टाम्प ड्यूटी सहित अन्य राजस्व में लाखों रुपए की क्षति होने की बात कही गई है।

अब इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर चल रही पुरानी जांच को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक राजस्व निरीक्षक के अनुसार, यह मामला करीब दो साल से जांच में था। उनका दावा है कि लंबे समय तक जांच आगे नहीं बढ़ सकी और मामला दबा रहा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

तीन महीने पहले पटवारियों ने की थी हड़ताल, इसके बाद बढ़ी हलचल

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, करीब तीन माह पहले आमला क्षेत्र के पटवारियों ने काम के बढ़ते बोझ को लेकर हड़ताल की थी। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में निलंबित किए गए पटवारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही थी। हड़ताल को लेकर आमला एसडीएम और पटवारियों के बीच नाराजगी की स्थिति बनने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि इसके बाद पहले से जांच में चल रहे जमीन संबंधी मामले को दोबारा सक्रिय किया गया और जांच आगे बढ़ी। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि पटवारियों की हड़ताल और वर्तमान निलंबन कार्रवाई के बीच कोई सीधा संबंध है। इसलिए इस दावे की पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगी।

रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदने पर उठे सवाल

जांच में सामने आया है कि चारों पटवारियों ने आमला मेन रोड क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदी। आरोप है कि संबंधित भूमि के संबंध में आवश्यक शासकीय अनुमति नहीं ली गई। वहीं व्यावसायिक उपयोग वाली जमीन को आवासीय प्रयोजन के लिए डायवर्जन किए जाने का भी मामला सामने आया है। प्रशासन अब यह पता लगा रहा है कि जमीन की खरीद किस प्रक्रिया के तहत हुई, संबंधित पटवारियों और उनके रिश्तेदारों की भूमिका क्या रही तथा राजस्व अभिलेखों में किस स्तर पर कार्रवाई की गई। इसी के साथ शासन को हुई वास्तविक राजस्व क्षति का भी आकलन किया जा रहा है।

कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं माना संतोषजनक

प्रकरण की जांच तहसीलदार और एसडीएम आमला द्वारा की गई थी। जांच में भूमि से संबंधित दस्तावेजों, क्रय-विक्रय की प्रक्रिया और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया। इसके बाद चारों पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्रशासन के अनुसार, उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद कलेक्टर ने निलंबन की कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच संस्थित कर दी।

अब एफआईआर हुई तो जांच का दायरा और बढ़ेगा

चारों पटवारियों के निलंबन के बाद अब मामले में एफआईआर दर्ज होने की भी चर्चा है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच में यदि नियमों के उल्लंघन के साथ आपराधिक कृत्य या शासन को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के तथ्य सामने आते हैं तो पुलिस प्रकरण दर्ज कराया जा सकता है। हालांकि, एफआईआर दर्ज करने को लेकर फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

इन सवालों के जवाब जांच में तलाशे जाएंगे

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रकरण करीब दो साल से जांच में था तो कार्रवाई अब क्यों हुई? क्या पहले जांच में कोई कमी रह गई थी या बाद में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामला दोबारा खोला गया? जमीन खरीदने में रिश्तेदारों की भूमिका क्या थी? व्यावसायिक भूमि के उपयोग में बदलाव किस स्तर पर हुआ? और इससे शासन को वास्तविक कितनी राजस्व क्षति हुई? इन सभी सवालों के जवाब अब विभागीय जांच में सामने आने की उम्मीद है। यदि जांच में पुराने प्रकरण को लंबित रखने में किसी अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा चार पटवारियों से आगे भी बढ़ सकता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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