Congress’s List: कांग्रेस की सूची पर सियासी बवाल: आजाद पार्टी के नेता को बांट दी पद की रेवड़ी

आजाद समाज पार्टी के कार्यालय प्रभारी का आरोप- उनसे बिना पूछे दे दिया पद
Congress’s List: बैतूल। जिला कांग्रेस कमेटी की मंडलम कार्यकारिणी की सूची सामने आते ही कांग्रेस संगठन की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सियासी सवाल खड़े हो गए हैं। किदवई वार्ड निवासी रवि अतुलकर को मंडलम उपाध्यक्ष बना दिया गया, जबकि वे आजाद समाज पार्टी में कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रवि के मुताबिक कांग्रेस ने उन्हें पद देने से पहले न तो संपर्क किया और न ही उनकी सहमति ली। उन्हें इसकी जानकारी तब लगी, जब कांग्रेस की सूची सार्वजनिक हुई।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा के लेटरहेड पर जारी सूची सोशल मीडिया पर सामने आते ही मामला चर्चा में आ गया। सूची में अपना नाम देखकर रवि अतुलकर भी हैरान रह गए। इसके बाद आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क कर नियुक्ति की जानकारी ली।
कांग्रेस की सूची देखकर खुद बोले- मैं तो आजाद समाज पार्टी में हूं
रवि अतुलकर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे आजाद समाज पार्टी में कार्यालय प्रभारी हैं। कांग्रेस की ओर से मंडलम उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर उनसे किसी तरह की बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस की सूची सामने आने के बाद ही पता चला कि उनका नाम मंडलम उपाध्यक्ष के रूप में शामिल कर दिया गया है। यानी जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने अपनी संगठनात्मक टीम का हिस्सा बताया, उसे खुद इस नियुक्ति की जानकारी नहीं थी। यही बात अब कांग्रेस की नियुक्ति प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
आजाद समाज पार्टी ने भी उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद आजाद समाज पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई। पार्टी के प्रदेश कोर कमेटी सदस्य पंकज अतुलकर ने कांग्रेस की इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन में शामिल करने की जल्दबाजी में क्या कांग्रेस ने राजनीतिक पृष्ठभूमि की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा? उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अपनी संगठनात्मक मजबूती दिखाने के लिए ऐसे लोगों के नाम भी पदाधिकारियों की सूची में शामिल कर रही है, जो पहले से किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़े हैं?
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की मंडलम सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर दिया है। संगठन में पद देने से पहले संबंधित व्यक्ति से संपर्क, उसकी सहमति और राजनीतिक सक्रियता की जानकारी लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। लेकिन रवि अतुलकर का मामला सामने आने के बाद सवाल है कि क्या सूची तैयार करते समय इन बिंदुओं का सत्यापन किया गया था?
यदि कांग्रेस संगठन ने बाकायदा सहमति के बाद ही नाम शामिल किए हैं तो रवि अतुलकर का कहना इसके उलट क्यों है? और यदि उनसे संपर्क ही नहीं किया गया तो फिर उनका नाम सूची में किस आधार पर शामिल हुआ?
एक नाम ने खोल दी कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी की पोल?
मंडलम स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस द्वारा पदाधिकारियों की घोषणा की गई है। लेकिन सूची में दूसरे राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति का नाम आने से पूरी कवायद पर ही चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में अब सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस ने संगठन विस्तार की जल्दबाजी में नामों की पड़ताल में चूक की या फिर सूची तैयार करने में कोई और गड़बड़ी हुई?
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