Betul News: आधार में अजय, खसरे में अज्जू… फिर भी हो गई रजिस्ट्री!

रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेजों की जांच पर उठे सवाल, उप पंजीयक के हस्ताक्षर के बाद पंजीयन, मामला कलेक्टर और वाणिज्यिक कर विभाग तक पहुंचाने की तैयारी
Betul News: बैतूल। रजिस्ट्री कार्यालय में कथित अतिरिक्त वसूली के आरोपों के बीच अब दस्तावेजों की जांच और पंजीयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में व्यक्ति का नाम अलग-अलग दर्ज होने के बावजूद पंजीयन किए जाने का आरोप है। शिकायत में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति के आधार कार्ड में नाम ‘अजय(परिवर्तित नाम) दर्ज है, जबकि खसरे में उसका नाम अज्जू( परिवर्तित नाम) दर्ज बताया गया है। इसके बावजूद संबंधित रजिस्ट्री पर उप पंजीयक के हस्ताक्षर हुए और दस्तावेज का पंजीयन कर दिया गया।
मामले से जुड़ा दस्तावेज भी सामने आया है, जिसमें रजिस्ट्री क्रमांक रूक्क 46ढ्ढत्रक्र16852026 और दस्तावेज क्रमांक ्र100611017 का उल्लेख है। दस्तावेज पर 22 मई 2026 की तारीख दर्ज दिखाई दे रही है। अब यह मामला सामने आने के बाद विभाग के फर्जीवाड़े की पोल खुलते नजर आने लगी है।
नाम में अंतर, फिर भी पंजीयन कैसे?
रजिस्ट्री प्रक्रिया में पक्षकार की पहचान और उसके दस्तावेजों का सत्यापन अहम माना जाता है। ऐसे में आधार कार्ड और खसरे में नाम अलग होने के बावजूद यदि उसी व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री का पंजीयन हुआ है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि दस्तावेजों का मिलान किस स्तर पर किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाम के इस अंतर के बावजूद उप पंजीयक द्वारा रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर कर दिए गए। यदि दस्तावेजों में दर्ज नाम वास्तव में अलग-अलग व्यक्तियों से संबंधित हैं अथवा पहचान संबंधी आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तो मामला गंभीर हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
‘नियमों की जांच हुई या सिर्फ कागज पूरे किए गए?
रजिस्ट्री कार्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। अब यह नया मामला सामने आने के बाद कार्यालय की दस्तावेज जांच प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल यह है कि जब आधार और राजस्व रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग था तो संबंधित अधिकारी ने इस अंतर का परीक्षण कैसे किया? यदि नाम में अंतर को नियमानुसार स्पष्ट किया गया था तो उसका आधार क्या था? और यदि आवश्यक स्पष्टीकरण अथवा दस्तावेज लिए गए थे तो वे रिकॉर्ड में मौजूद हैं या नहीं? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
कलेक्टर से जांच की मांग, शासन तक पहुंचेगा मामला
बताया जा रहा है कि इस मामले को अब जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष कलेक्टर के समक्ष भी रखा जाएगा। साथ ही राज्य शासन के वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी है। शिकायतकर्ता की मांग है कि संबंधित रजिस्ट्री की पूरी फाइल, पक्षकारों के पहचान दस्तावेज, खसरा रिकॉर्ड और पंजीयन के दौरान की गई जांच की प्रक्रिया को सामने रखकर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अचानक जांच हुई तो खुल सकती है पूरी प्रक्रिया
रजिस्ट्री कार्यालय को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब केवल आरोपों पर बयानबाजी के बजाय दस्तावेजों की जांच जरूरी हो गई है। कलेक्टर द्वारा संबंधित रजिस्ट्री की फाइल मंगाकर यह जांच कराई जा सकती है कि आधार में अजय और खसरे में अज्जू दर्ज होने के बावजूद पंजीयन किस आधार पर किया गया। यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी। वहीं यदि दस्तावेजों के सत्यापन में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। इस संबंध में कलेक्टर डॉ संजय सौरभ सोनवणे को मोबाइल नंबर 7701071112 पर संपर्क किया पर उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।
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