Betul Samachar: नाजुक कंधों पर भारी भरकम बोझ, स्कूली पॉलिसी की उड़ रही धज्जियाँ

कम नहीं हो रही है निजी स्कूलों की मनमानी

Betul Samachar: बैतूल। नई शिक्षा नीति और स्कूल बैग पॉलिसी-2020 लागू होने के बाद भी जिले के अनेक सरकारी और निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों के बस्तों का वजन निर्धारित मानकों से अधिक बना हुआ है।

खासकर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे रोजाना कई विषयों की किताबें, कॉपियां और अन्य अध्ययन सामग्री लेकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। इससे उनके कंधों, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिसे विशेषज्ञ बच्चों के शारीरिक विकास के लिए नुकसानदायक मानते हैं।

अभिभावकों का कहना है कि अधिकांश विद्यालयों में समय-सारिणी का सही तरीके से पालन नहीं होने के कारण बच्चों को लगभग सभी विषयों की किताबें और कॉपियां प्रतिदिन साथ ले जानी पड़ती हैं। कई निजी विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की अतिरिक्त पुस्तकें और अभ्यास पुस्तिकाएं भी अनिवार्य कर दी जाती हैं, जिससे बस्ते का वजन और बढ़ जाता है।

लगातार शिकायतों के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों पर बढ़ते बस्ते के बोझ को कम करने के लिए विद्यालयों में सीमित विषयों की पढ़ाई, डिजिटल अध्ययन सामग्री का उपयोग, लॉकर सुविधा तथा अनावश्यक पुस्तकों पर रोक जैसे उपाय प्रभावी साबित हो सकते हैं।

उनका कहना है कि यदि स्कूल समय-सारिणी के अनुसार पढ़ाई कराएं और केवल आवश्यक सामग्री ही लाने के निर्देश दें तो बच्चों के बस्तों का वजन काफी हद तक कम किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष शिक्षा विभाग ने स्कूल बैग पॉलिसी के पालन को लेकर जांच के निर्देश जारी किए थे। शुरुआती दिनों में कई विद्यालयों में सुधार भी देखने को मिला, लेकिन समय बीतने के साथ अधिकांश संस्थानों में नियमों का पालन फिर ढीला पड़ गया।

अभिभावकों का आरोप है कि निरीक्षण की कमी के कारण कई स्कूल निर्धारित मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से नियमित निरीक्षण, औचक जांच और नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को भारी बस्तों के बोझ से राहत मिलनी चाहिए ताकि वे स्वस्थ, सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।

बैग पॉलिसी में निर्धारित है मानक भार

स्कूल बैग पॉलिसी-2020 के अनुसार कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों के बस्ते का वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम, तीसरी से पांचवीं तक 1.7 से 2.5 किलोग्राम, छठी और सातवीं के लिए 2 से 3 किलोग्राम, आठवीं और नौवीं के लिए 2.5 से 4 किलोग्राम तथा दसवीं के लिए 2.5 से 4.5 किलोग्राम निर्धारित किया गया है। ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए विषय समूह के आधार पर अलग-अलग मानक तय किए गए हैं।

निर्धारित सीमा से अधिक वजन पाए जाने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन को जिम्मेदार माना जाएगा। इस पूरे मामले को लेकर चर्चा के जिला शिक्षा अधिकारी पूनम वरकडे से संपर्क किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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