Betul News: बैतूल में सिंचाई और पेजयल का बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार

2047 तक प्यास नहीं, पानी की गारंटी! दर्जनों गांवों और शहरों के लिए भी बढ़ेगी जलापूर्ति क्षमता
Betul News: बैतूल। जिले में बढ़ती आबादी, भूजल स्तर में गिरावट और कृषि क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जल संसाधन विभाग और शहरी विकास अभिकरण ने आने वाले वर्षों के लिए व्यापक जल प्रबंधन और सिंचाई विस्तार की योजना तैयार की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार नई सिंचाई परियोजनाओं, जलाशयों और पेयजल योजनाओं के माध्यम से हजारों हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा तथा शहरों को भविष्य की पेयजल सुरक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
बैतूल विधानसभा क्षेत्र की घोघरी मध्यम परियोजना में लगभग 39.01 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित किया जाएगा। इससे आसपास के गांवों में भूजल स्तर बढ़ेगा तथा 4.26 मिलियन घनमीटर पानी पेयजल के लिए आरक्षित रहेगा। वर्ष 2025-26 में 4,000 हेक्टेयर और 2026-27 में लगभग 11,987 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूर्ण होने पर 43 गांवों को इसका लाभ मिलेगा।
भैंसदेही क्षेत्र में दो नए जलाशयों से बढ़ेगी सिंचाई
सावन्याकोल लघु जलाशय के माध्यम से 0.75 मिलियन घनमीटर पानी रोका जाएगा, जिससे 150 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और दो गांवों को लाभ मिलेगा। वहीं पाथाखेड़ा लघु जलाशय में 0.85 मिलियन घनमीटर जल संग्रहण की योजना है। वर्ष 2026-27 तक 225 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे तीन गांव लाभान्वित होंगे।
आमला और मुलताई क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ
आमला विधानसभा क्षेत्र में तिरमऊ बैराज से 185 हेक्टेयर तथा कोठरबापा बैराज से 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल रही है। इन योजनाओं से क्रमश: 123 और 133 किसानों को निरंतर लाभ मिल रहा है। मुलताई क्षेत्र की वर्धा मध्यम परियोजना जिले की सबसे बड़ी सिंचाई योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है और 13 गांवों के लगभग 3,800 किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
भूजल संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि नई जलाशय परियोजनाओं से केवल सिंचाई ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि वर्षा जल संचयन के कारण भूजल स्तर में भी सुधार होगा। इससे किसानों की निर्भरता नलकूपों पर कम होगी और भविष्य में पेयजल संकट की संभावना भी घटेगी। जल संसाधन विभाग और शहरी विकास अभिकरण की संयुक्त योजना से बैतूल जिले में कृषि, पेयजल और भूजल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो वर्ष 2047 तक जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए जल सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार हो सकेगा।
शहरों के लिए भी तैयार हो रहा भविष्य का जल रोडमैप
शहरी विकास अभिकरण द्वारा तैयार आंकड़ों के अनुसार बैतूल शहर की अनुमानित आबादी वर्ष 2047 तक 1.60 लाख पहुंच सकती है। इसके लिए प्रतिदिन लगभग 22 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) जल आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में उपलब्ध जल क्षमता 12 एमएलडी के आसपास है, इसलिए भविष्य की मांग को देखते हुए नई जल संरचनाओं और स्रोतों के विकास की आवश्यकता बताई गई है।
आमला, सारणी, मुलताई, बैतूल बाजार, भैंसदेही, घोड़ाडोंगरी और शाहपुर सहित अन्य नगरीय निकायों के लिए भी अमृत 2.0 तथा जल आवर्धन योजनाओं के तहत दीर्घकालिक जलापूर्ति व्यवस्था तैयार की जा रही है। इस संबंध में जलसंसाधन विभाग के ईई रोशन कुमार और नपा के सीएमओ नवनीत पांडेय से चर्चा करने के लिए काल किया, लेकिन दोनों ने मोबाइल रिसीव नहीं किया।
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