Betul News: बैतूल सीएमएचओ डॉ. हुरमाड़े पर विभागीय शिकंजा, आउटसोर्स भर्ती और भुगतान में अनियमितताओं के आरोप, 15 दिन में मांगा जवाब

जूस इंटरप्राइजेज भोपाल का नाम भी शामिल
Betul News: बैतूल। मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े के खिलाफ गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत डॉ. हुरमड़े को आरोप पत्र जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जारी आरोप पत्र में मुख्य रूप से आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति, भुगतान और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में आउटसोर्स एजेंसी मेसर्स जूस इंटरप्राइजेज, भोपाल (Juice Enterprises Bhopal) का नाम भी सामने आया है, जिसके माध्यम से जिले में कर्मचारियों की नियुक्तियां और भुगतान किए गए थे।
निविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी एजेंसी को कार्य देने का आरोप
आरोप पत्र के अनुसार वर्ष 2024 में स्वास्थ्य विभाग के अधीन समूह-डी आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए मेसर्स जूस इंटरप्राइजेज, भोपाल को अधिकृत किया गया था। आरोप है कि एजेंसी की निविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी बिना सक्षम स्वीकृति और बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए उसी एजेंसी से कार्य लिया जाता रहा।
विभाग का कहना है कि एजेंसी की अवधि समाप्त होने के बाद नई निविदा प्रक्रिया अपनाने के बजाय उसी संस्था को कार्य जारी रखा गया, जिससे शासन के वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ। आरोप पत्र में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासन को आर्थिक हानि पहुंचाने वाला कृत्य बताया गया है।
250 की जगह 450 कर्मचारियों का भुगतान
विभागीय आरोपों के अनुसार वर्ष 2024-25 में बैतूल जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 250 आउटसोर्स कर्मचारियों की आवश्यकता और स्वीकृति थी। इसके बावजूद दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान लगभग 450 कर्मचारियों के वेतन भुगतान के दस्तावेज सामने आए।
आरोप है कि स्वीकृत संख्या से करीब 200 अधिक कर्मचारियों का भुगतान किया गया। विभाग का मानना है कि यह शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत है और इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंप्यूटर ऑपरेटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर और मल्टी-स्किल्ड वर्कर जैसे पदों पर स्वीकृत संख्या से अधिक नियुक्तियां और भुगतान किए गए।
कलेक्टर की जांच समिति ने उठाए सवाल
आरोप पत्र में कलेक्टर बैतूल द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि समिति ने भर्ती और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि एजेंसी की अवधि बढ़ाने से संबंधित प्रक्रिया और भुगतान संबंधी निर्णयों में कई विसंगतियां थीं।
रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी को कार्य जारी रखने के संबंध में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच हुए पत्राचार तथा भुगतान अभिलेखों का परीक्षण किया गया, जिसमें कई बिंदुओं पर नियमों के पालन को लेकर प्रश्न खड़े हुए।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप
आरोप पत्र का सबसे गंभीर हिस्सा भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। विभाग का आरोप है कि मेसर्स जूस इंटरप्राइजेज, भोपाल द्वारा भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप व्यापक स्तर पर आवेदन आमंत्रित किए गए। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन आरोप पत्र में इन शिकायतों को गंभीरता से दर्ज किया गया है।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
विभाग ने आरोप लगाया है कि डॉ. हुरमड़े ने अपने पद पर रहते हुए वित्तीय अनुशासन, शासकीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जवाबदेही का अपेक्षित पालन नहीं किया। आरोप पत्र में कहा गया है कि उनका आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होता है।
15 दिन में देना होगा जवाब
विभाग ने डॉ. मनोज हुरमड़े को आरोप पत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही यदि वे व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं या अपने पक्ष में कोई दस्तावेज प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उसका भी अवसर दिया गया है।
जवाब प्राप्त होने के बाद विभाग आरोपों की समीक्षा करेगा और उसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।




