Politics: राजनीतिक हलचल: प्रथम नागरिकों की आम लोगों से चुनाव के पहले कैसी बेरुखी?? 2 दो ध्रुवों के बीच अभी से क्यों चल रही रस्साकशी??? अधिकारी के तबादले को लेकर पार्टी समर्थित व्यापारियों की पीड़ा कैसे आई सामने????विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

प्रथम नागरिक की दूरी क्या गुल खिलाएगी?

जिले के कुछ निकायों में जनता द्वारा चुने गए प्रथम नागरिक जीत हासिल करने के बाद से आम लोगों से दूरिया बनाए हुए हैं। इन्हें पद मिलने के बाद स्वभाव में जो परिवर्तन आया है, इससे आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही है। कहने को तो सत्तारूढ़ पार्टी के यह प्रथम नागरिक सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी जवाबदेही निभाते दिख रहे हैं, लेकिन इसके बाद यदि कभी कभार कार्यालय आ गए तो ठीक वरना केवल महत्वपूर्ण फोन को छोड़ किसी काम के लिए फोन करने वाले व्यक्ति का काल तक रिसीव नहीं हो पा रहा है।

यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। चर्चा है कि निकाय चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है और जिले की सबसे बड़ी निकाय, माचना किनारे की एक नगर परिषद और एक ही परिवार से तीन पार्षद वाली निकाय के प्रथम नागरिक अपने दायित्व से परे हट रहे हैं। आम लोगों से चुनावी वर्ष में इनकी दूरियां कहीं पार्टी के लिए मुसीबत न बन जाए, इसकी तीनों नगरीय क्षेत्र में जमकर चर्चा चल रही है।

चुनाव के पहले रसाकसी

एक सुरक्षित विधानसभा में अभी से सत्तारूढ़ पार्टी के दो वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के बीच संभावित दावेदारी को लेकर जमकर रसाकसी चल रही है। चर्चा है कि इस विधानसभा में पहले से ही महिला जनप्रतिनिधि पावर में है। वे चुनी जनप्रतिनिधि होने के साथ दबंग विधायक की पत्नी रह चुकी है। इसी विधानसभा से एक अन्य पूर्व जनप्रतिनिधि को कुछ माह पहले प्रतिष्ठित पद से नवाज कर उसका रूतबा बढ़ाया है। जैसे ही उनका यह पद मिला, उन्होंने अपने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी।

कुछ मामलों में वे माननीय से आगे आकर लोगों की समस्या का निराकरण कर हीरो बन गए। इसी के बाद दोनों जनप्रतिनिधियों में अघोषित रूप से ठन सी गई है। इसका नजारा इस विस क्षेत्र के एक प्रमुख नगर में एक विभाग की समीक्षा बैठक में देखने को मिला है। यहां कुर्सी न मिलने से नाराज महिला जनप्रतिनिधि आग बबूला होकर अधिकारियों को फटकार लगाने के बाद बैठक का बहिष्कार कर चुकी है। जनप्रतिनिधियों के बीच इस रसाकसी की नजर पार्टी संगठन भी बारिकी से नजर बनाए हुए हैं।

पार्टी समर्थित व्यापारियों की पीड़ा

पिछले दिनों वर्दी वाले विभाग में एक चर्चित अधिकारी की जिले से रवानगी हो रही है। इसके पीछे उनकी अपने वरिष्ठ अधिकारी से किसी मामले को लेकर पटरी न बैठना मुख्य वजह बताया जाता है। हालांकि यह मामला राजनीतिक सुर्खियां भी बटोरते रहा। चर्चा है कि मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप भी चला। पिछले दिनों विभागीय तबादला सूची में साहब की रवानगी हुई तो अधिकांश सत्तारूढ पार्टी से समर्थित व्यापारियों ने क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि से मिलने का प्रयास किया, लेकिन वे बैतूल में उपलब्ध नहीं हो सके और तब तक अधिकारी को अपने वरिष्ठ ने एकतरफा रिलीव कर दिया।

हालांकि अधिकारी अपने व्यापारी होने के साथ सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं से इसके बाद भी संपर्क में रहे, लेकिन दाल नही गली। चर्चा है कि इस मामले में व्यापारी संबंधित अधिकारी को अपने क्षेत्र में पदस्थ करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा हरे हैं, लेकिन उनकी दाल नहीं लग रही है। अब अधिकारी भी लूपलाइन में बैठकर नई पदस्थापना का इंतजार कर रही है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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