Betul Samachar: सवा तीन करोड़ की व्हाइट टॉपिंग सडक़ पहली बारिश में ही दरकी, 25 साल की गारंटी पर उठे सवाल

गांधी चौक पर उखडऩे लगी सडक़, दूसरी बारिश में ही खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल
Betul Samachar: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। शहर में सवा तीन करोड़ की लागत से बनाई गई व्हाइट टॉपिंग सडक़ पहली ही बारिशों में सवालों के घेरे में आ गई है। इस सडक़ को लगभग 25 वर्ष तक टिकाऊ और रखरखाव मुक्त बताया गया था, लेकिन मानसून की दूसरी ही बारिश में सडक़ पर दरारें और गिट्टी उखडऩे की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
लोक निर्माण विभाग द्वारा कोतवाली चौक से शिवाजी चौक तक व्हाइट टॉपिंग सडक़ का निर्माण कराया गया है। यह कार्य कपिल शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया गया। निर्माण के दौरान दावा किया गया था कि आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से तैयार यह सडक़ वर्षों तक बिना किसी बड़ी मरम्मत के उपयोग में रहेगी। लेकिन शुरुआती बारिश में ही सडक़ की हालत बिगडऩे लगी है।
गांधी चौक पर सबसे अधिक नुकसान
सडक़ का सबसे ज्यादा नुकसान गांधी चौक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। यहां सडक़ का करीब एक से तीन फीट का हिस्सा गिट्टी छोड़ चुका है और सतह पर स्पष्ट दरारें दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में यह हिस्सा छोटा था, लेकिन लगातार बारिश के बाद इसका दायरा बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में सडक़ और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकती है।
राहगीरों और व्यापारियों में नाराजगी
क्षेत्र के व्यापारियों और वाहन चालकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सडक़ का इतनी जल्दी खराब होना चिंताजनक है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ होता तो दूसरी ही बारिश में सडक़ की यह स्थिति नहीं होती। नागरिकों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
25 साल की टिकाऊ सडक़ पर उठे सवाल
व्हाइट टॉपिंग सडक़ें सामान्य डामर सडक़ों की तुलना में अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इनका निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए तो इनकी आयु 20 से 25 वर्ष तक हो सकती है। ऐसे में निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद सडक़ का क्रैक होना और गिट्टी छोडऩा गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा करता है। यह स्थिति निर्माण सामग्री, तकनीकी प्रक्रिया अथवा गुणवत्ता नियंत्रण में कमी की ओर भी संकेत कर सकती है, जिसकी जांच आवश्यक मानी जा रही है।
जांच और जवाबदेही की मांग
शहरवासियों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग को तत्काल प्रभावित स्थल का निरीक्षण कराना चाहिए और विशेषज्ञों से सडक़ की तकनीकी जांच करानी चाहिए। यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से की शीघ्र मरम्मत कराई जाए ताकि बारिश के मौसम में सडक़ और अधिक खराब न हो तथा आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सडक़ का लाभ मिल सके। अब देखना होगा कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर उठे सवालों के बीच विभाग क्या कार्रवाई करता है और निर्माण एजेंसी से जवाबदेही कैसे तय की जाती है।
इनका कहना
मेरे संज्ञान में जानकारी आई है, सडक़ में क्रैक और गड्ढा हो रहा है तो इसे समय रहते दुरुस्त करवाया जाएगा, ताकि ज्यादा नुकसान ना हो पाए।
मनीष मरकाम
ईई पीडब्ल्यूडी बैतूल
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