Betul Samachar: मुहर्रम की छुट्टी पर चला तुगलकी फरमान! सहकारी समितियों के कर्मचारियों ड्यूटी पर

सेवा नियम देखने के बाद तय होगा कौन देगा दो दिन का वेतन
Betul Samachar: बैतूल। मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुहर्रम के अवसर पर घोषित सार्वजनिक अवकाश के बावजूद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से सम्बंधित समितियों में कर्मचारियों से काम कराने का मामला सामने आया है। बैंक की महाप्रबंधक परिधि अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के बाद कर्मचारियों में नाराजगी और आदेश की वैधानिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जारी आदेश के अनुसार 26 और 27 जून 2026 को बैंक की सभी शाखाओं में कोर बैंकिंग सिस्टम चालू रखा गया। हालांकि इन दो दिनों में सामान्य ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं बंद रहीं। शाखाओं को केवल समिति संबंधी कार्य, रबी सीजन की वसूली तथा अन्य आंतरिक बैंकिंग कार्यों के लिए संचालित करने के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाल ये है कि किस आदेश के तहत मुहर्रम पर कर्मचारियी की छुट्टी रद्द की गई। वह भी तब जब इस तरह के अवकाश प्रदान करने और रद्द करने का अधिकार केवल सीएम को होता है।
0 प्रतिशत ऋण की वसूली को बताया कारण
महाप्रबंधक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि रबी सीजन की वसूली की अंतिम तिथि 30 जून 2026 होने के कारण यह व्यवस्था आवश्यक है। इसी आधार पर सभी समिति प्रबंधकों को अवकाश के दिन भी कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इस आदेश के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
कर्मचारी पक्ष का कहना है कि शासन द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश को निरस्त करने का अधिकार संबंधित सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर होता है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि बैंक प्रबंधन ने किस प्राधिकृत आदेश या अनुमति के आधार पर अवकाश के दिन कर्मचारियों से कार्य कराया गया। बताया यह भी जा रहा है कि वसूली के निर्देश 15 जून तक थे, लेकिन 30 जून तक वसूली समझ से परे है।
कर्मचारियों का दो दिन का वेतन भी खटाई में पड़ा
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 26 जून को मुहर्रम पर्व पर शासन का घोषित अवकाश था और 27 जून को शनिवार अवकाश रहता ही है। यहां यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि अवकाश के दिन कार्य करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन, प्रतिपूरक अवकाश अथवा अन्य नियमानुसार मिलने वाले लाभ आखिर किस मद से दिए जाएंगे।
इस संबंध में बैंक प्रबंधन का कहना है कि वेतन मिलेगा या नहीं यह सेवा नियमो को देखने के बाद स्पस्ट हो पाएगा, सवाल यह खड़ा हो रहा है कि, यदि सेवा नियमो में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं होगा तो सैकड़ो कर्मचारियो को वेतन की अदायगी कैसे की जाएगी।
वसूली को लेकर बैंक प्रबंधन का तर्क है कि किसानों से जुड़ी रबी ऋण वसूली समय-सीमा के भीतर पूरी करना आवश्यक था, इसलिए सीमित कार्यों के लिए समितियों को संचालित रखने का निर्णय लिया गया। हालांकि इस निर्णय की वैधानिक प्रक्रिया और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है।
अब कर्मचारियों और आमजन की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बैंक प्रबंधन इस पूरे मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और क्या संबंधित सक्षम प्राधिकारी इस आदेश की वैधता पर कोई निर्णय लेते हैं।
इनका कहना…..
समितियों से वसूली की तारीख 30 जून तक होती है, शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के लिए समितियों को निर्देश दिए गए थे। रही बात वेतन की तो सेवा नियमो को देखने के बाद ही तय हो पायेगा की दो दिन का वेतन कैसे दिया जाएगा।
परिधि अग्रवाल, महा प्रबंधक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक



