Betul Ki Khabar: मेजर हार्ट अटैक से जूझे वरिष्ठ पत्रकार ऋषु नायडू, समय पर उपचार से बची जान

डॉक्टर बोले- आधा घंटा और देर होती तो बचाना मुश्किल था
सीने में दर्द को हल्के में ना लीजिए
समय रहते जांच और उपचार से ही बच सकता है जीवन…
Betul Ki Khabar: बैतूल। इन दिनों हम अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स और अपने आसपास देख रहे हैं कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं । इन घटनाओं में सबसे चिंताजनक बात ये है कि हर उम्र के लोग इनका शिकार हो रहे हैं । सीने में दर्द को केवल गैस की समस्या समझने की भूल कतई न करें क्योंकि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब सामान्य से दर्द मेजर या माइनर हार्ट अटैक पाया गया ।
समय रहते उचित सलाह और उपचार ही जीवन को बचा सकते हैं । कुछ ऐसे केस हिस्ट्री हैं जहां समय रहते उपचार से हमने लोगों का जीवन बचाया है। आज की केस हिस्ट्री में बात वरिष्ठ पत्रकार रिशु नायडू की ।
जिले के वरिष्ठ पत्रकार ऋषु कुमार नायडू को गत 6 जून को गंभीर हार्ट अटैक आने के बाद लिंक रोड स्थित सिम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि चिकित्सक के अनुसार यदि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में आधे घंटे की भी देरी हो जाती तो उनकी जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता। चिकित्सक की तत्परता और लगातार निगरानी के चलते आखिरकार उनकी स्थिति में सुधार आया और 24 घंटे बाद वे खतरे से बाहर हो गए।
सिम्स हॉस्पिटल के संचालक डॉ. श्याम सोनी ने बताया कि जब पत्रकार ऋषु नायडू अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें अत्यंत गंभीर प्रकार का हार्ट अटैक था। हार्ट अटैक हृदय के एक हिस्से से बढ़कर दूसरे हिस्से तक फैल चुका था। ईसीजी जांच में एसटी एलिवेशन करीब 19 मिमी तक पहुंच गया था, जो गंभीर हृदयाघात का संकेत माना जाता है।
फेफड़ों में पानी भरने और ब्लड प्रेशर गिरने से बढ़ा खतरा
डॉ. सोनी के अनुसार हार्ट अटैक के साथ मरीज को पल्मोनरी एडेमा की स्थिति भी थी, जिसमें फेफड़ों में तरल पदार्थ भरने लगता है। इसके बाद उन्हें कार्डियोजेनिक शॉक भी हो गया, जिसके कारण उनका रक्तचाप बेहद कम हो गया था। यह स्थिति जानलेवा मानी जाती है।उन्होंने बताया कि मरीज को तत्काल आपातकालीन उपचार दिया गया और हार्ट अटैक के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष इंजेक्शन लगाए गए। समय पर उपचार शुरू होने से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
एक दिन पुराना था हार्ट अटैक
डॉ सोनी के अनुसार 5 जून को किए गए ईसीजी में हार्ट अटैक के संकेत मौजूद थे, लेकिन 24 घंटे बाद 6 जून को जब दोबारा जांच की गई तो पता चला कि हार्ट अटैक और अधिक बढ़ चुका है तथा हृदय के दूसरे हिस्से को भी प्रभावित कर चुका है। हार्ट अटैक की पुष्टि रक्त जांच के माध्यम से हुई। इसके बाद किए गए ईको परीक्षण में भी स्पष्ट हो गया कि हृदय के दो हिस्से प्रभावित हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गई थी।
बार-बार गिर रहा था ब्लड प्रेशर
डॉ. सोनी ने बताया कि हार्ट अटैक लगभग 24 घंटे पुराना होने के कारण हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। पंपिंग कम होने से मरीज का रक्तचाप बार-बार गिर रहा था। इस दौरान उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया और आवश्यक दवाओं व उपचार के जरिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया गया। गहन चिकित्सा और लगातार प्रयासों के बाद लगभग 24 घंटे में उनकी स्थिति स्थिर हुई और वे खतरे से बाहर आ गए।
एंजियोग्राफी में सामने आया दो धमनियों में ब्लॉकेज
प्रारंभिक खतरा टलने के 3 दिन बाद डॉ सोनी की सलाह पर पत्रकार रिशु नायडू की नागपुर में एंजियोग्राफी की, जिसमें पता चला कि हृदय की दो प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज है। इसके बाद आगे के उपचार की योजना बनाई गई। डॉ. सोनी ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी मेडिकल टीम ने लगातार प्रयास किए, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। धीरे-धीरे हार्ट अटैक के कारण होने वाला दर्द कम हुआ और मरीज की हालत में लगातार सुधार होता गया।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि सीने में दर्द, घबराहट, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। हार्ट अटैक की स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना ही जीवन और मृत्यु के बीच का सबसे बड़ा अंतर साबित हो सकता है। ऋषु नायडू के मामले में भी समय पर मिला उपचार उनकी जान बचाने में निर्णायक साबित हुआ।
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