Betul News: परिषद की बैठक में कचरा निष्पादन ठेकेदार की बैकडोर एंट्री पर सवालिया निशान

भुगतान में रियायत दिलाने की कोशिश पर भी विवाद, कई पार्षदों की नाराजगी आई सामने
Betul News: बैतूल। पिछले दिनों नगर पालिका परिषद के विशेष सम्मेलन में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है ,जिसने परिषद की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जहां पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया, वहीं ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा निष्पादन करने वाले विवादित ठेकेदार को कथित रूप से बैक डोर से बैठक में शामिल करा दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि पूरी बैठक के दौरान अधिकांश पार्षदों को भी इसकी भनक नहीं लगी। सीएमओ ने ठेकेदार को अंदर प्रवेश की बात से इंकार किया है, जबकि कईपार्षदों ने उसे अंदर से बाहर निकलते देख आपत्ति भी जताई।
्जानकारी के अनुसार बैठक में उस ठेकेदार के भुगतान का मुद्दा चर्चा के लिए आया था। शासन के निर्देशों के अनुसार भुगतान से 10 प्रतिशत राशि काटने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) इस पर सहमत दिखाई नहीं दिए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने परिषद के समक्ष दो से चार प्रतिशत राशि काटकर भुगतान किए जाने का सुझाव रखा।
इसी बिंदु पर पार्षद आनंद प्रजापति ने आपत्ति दर्ज कराते हुए सवाल उठाया कि जिस ठेकेदार के कार्यों और विवादों के कारण पूर्व सीएमओ तक को निलंबन झेलना पड़ा तथा शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, उसके प्रति इतनी नरमी आखिर क्यों बरती जा रही है। इसके अलावा अन्य पार्षदों ने भी ठेकेदार की पेनाल्टी कम करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। यही वजह है कि 21 नंबर के प्रस्ताव पर सीएमओ को बैकफुट पर आना पड़ा।
बैठक के बाद ठेकेदार के अंदर होने की जानकारी आई सामने
बैठक के दौरान यह तथ्य सामने नहीं आया कि संबंधित ठेकेदार स्वयं परिषद कक्ष में मौजूद था, लेकिन सम्मेलन समाप्त होने के बाद जब कुछ पार्षदों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने दबी जुबान में इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यदि किसी ठेकेदार से संबंधित विषय पर चर्चा हो रही हो तो उसकी बैठक में मौजूदगी निष्पक्ष निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे हितों के टकराव और निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मीडिया से दूरी, ठेकेदार के प्रवेश पर सवाल
पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि परिषद की बैठकों में आमतौर पर पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया जाता। जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर क्या चर्चा हो रही है, इसकी जानकारी मीडिया को बैठक के बाद ही मिल पाती है। इस बार भी पत्रकारों को बाहर दरवाजे पर रोककर रखा गया, जबकि जिस ठेकेदार के भुगतान और कार्यों पर चर्चा हो रही थी, उसे कथित रूप से पिछले रास्ते से बैठक में बैठा लिया गया।
यह घटनाक्रम नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या परिषद की बैठकों में कुछ लोगों के लिए अलग नियम लागू होते हैं? क्या ठेकेदार की मौजूदगी में उसके भुगतान पर चर्चा करना नैतिक और प्रशासनिक रूप से उचित है? और सबसे बड़ा सवाल, जब मीडिया को बाहर रखा जाता है तो आखिर पर्दे के पीछे क्या-क्या निर्णय लिए जाते हैं?
अब जरूरत इस बात की है कि नगर पालिका प्रशासन पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दे और यह बताए कि संबंधित ठेकेदार को परिषद बैठक में किस अधिकार और अनुमति के आधार पर शामिल किया गया। अन्यथा यह मामला पारदर्शिता और जवाबदेही के बजाय पक्षपात और संरक्षणवाद की मिसाल बनकर रह जाएगा।
जुर्माने की राशि कम करने को लेकर भी विरोधाभाष
परिषद की बैठक में सीएमओ ने मनमाने तरीके से विषय रखकर पार्षदों की आपत्तियों को दरकिनार करने के भी आरोप लग रहे हैं। बताया जाता है कि सम्मेलन में कुल 31 विषय रखे गए थे, जिसमें से 21 नंबर के विषय में 21 मार्च के परिषद सम्मेलन का हवाला देते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लिगिसी वेस्ट कार्य की अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति प्रकरण में अग्रिम कार्रवाई पर पुन विचार और निर्णय को शामिल कर लिया गया है।
जबकि पूर्व में ट्रेचिंग ग्राउंड मामले में बड़ी लापरवाही सामने आने पर तत्कालीन सीएमओ और उपयंत्री पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि ठेकेदार की दस प्रतिशत राशि में कटौती करने के आदेश अधिकारियों ने दिए। इसके बावजूद पार्षदों का अभिमत जाने बिना बैठक में इस तरह का प्रस्ताव लिया। इसका सांसद प्रतिनिधि कैलाश धोटे, नपा उपाध्यक्ष महेश राठौर, पूर्व नपा अध्यक्ष और पार्षद आनंद प्रजापति, पार्षद विकास प्रधान ने भी विरोध किया। सभी ने ठेकेदार पर एक स्वर में दस प्रतिशत कटौती करने और उसे बैठक में शामिल करने का विरोध जताया।
इनका कहना…
हमने ठेकेदार को बैठक में शामिल नहीं किया। यह जरूर हो सकता है। वह परिषद की बैठक के दौरान बाहर घूम रहा होगा। पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार ही ट्रेचिंग ग्राउंड के ठेकेदार पर दस प्रतिशत की राशि कटौती की जाएगी।
नवनीत पांडे, सीएमओ, नपा बैतूल




