गुफ़्तगू: क्रिकेट मुकाबले में हारी टीम तो किसको आया गुस्सा? चौके-छक्कों से ज्यादा गूंजे तानों के शब्द!

गुफ़्तगू: शहर में एक समाज का क्रिकेट टूर्नामेंट इन दिनों वैसे तो खेल भावना और उत्साह के लिए सराहा जा रहा था, लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले ने अचानक माहौल को किसी टीवी सीरियल के हाई-वोल्टेज एपिसोड में बदल दिया। चौके-छक्कों की गूंज के बीच मैदान पर जो हुआ, उसने दर्शकों को खेल से ज्यादा ‘डायलॉग डिलीवरीÓ का अनुभव दे दिया।
करीब 500 दर्शकों की मौजूदगी में खेले गए इस मुकाबले में एक टीम की हार के बाद माहौल थोड़ा गरमाने लगा। चर्चा है कि हार के बाद मैदान में ही जुबानी जंग इतनी तेज हो गई कि खेल भावना कहीं पीछे छूट गई। विपक्षी टीम से जुड़े एक खिलाड़ी और एक समाजसेवी के बीच कहासुनी ने देखते ही देखते तू-तू, मैं-मैं का रूप ले लिया।
चर्चाओं के मुताबिक बात यहीं नहीं रुकी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कुछ देर के लिए मैदान किसी क्रिकेट ग्राउंड से ज्यादा राजनीतिक अखाड़ा नजर आने लगा। दर्शक दीर्घा में बैठे लोग पहले तो हैरान रहे, फिर मोबाइल कैमरों में पूरा ‘लाइव ड्रामाÓ कैद होने लगा। यह मुकाबला एक विपक्षी पार्टी की टीम के पराजित होने के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा में परिवर्तित हो गया।
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि अपनी हार के बाद विपक्षी पार्टी प्रमुख ने दूसरी टीम के कप्तान और सक्रिय समाजसेवी से अपशब्द कहे और इसके बाद दोनों में जमकर कहासुनी हो गई। मामला हाथापाई तक पहुुच गया, लेकिन समाज के लोगों ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर अलग किया। गुफ्तगू के मुताबिक इसी दौरान एक पक्ष की ओर से कथित तौर पर कड़े शब्दों में चेतावनी जैसी बातें भी सामने आईं, जिसने स्थिति को और गरमा दिया।
हालांकि मौके पर मौजूद अन्य लोगों और समाज के वरिष्ठजनों ने तुरंत हस्तक्षेप कर मामले को किसी बड़ी अनहोनी में बदलने से रोक लिया। बहरहाल, मैच तो खत्म हो गया, लेकिन मैदान के बाहर की यह एक्स्ट्रा इनिंग्स अब शहरभर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई हैं। कोई इसे खेल के जोश का असर बता रहा है तो कोई इसे अनावश्यक तकरार। सच क्या था, ये तो मैदान के खिलाड़ी ही जानते हैं, लेकिन इतना तय है, इस बार चर्चा स्कोर से ज्यादा ‘स्लेजिंगÓ की हो रही है।



