Betul News: तेज गर्मी में सूख गई जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई

टैगोर वार्ड की हरियाली योजना बदहाल, लाखों की लागत पर उठे सवाल

Betul News: बैतूल। शहर को सुंदर, स्वच्छ और हरियाली से भरपूर बनाने के दावों के बीच टैगोर वार्ड में नगर पालिका द्वारा शुरू की गई एक आकर्षक योजना अब लापरवाही की मिसाल बनती नजर आ रही है। नई सड़क के किनारे बड़े-बड़े सजावटी गमलों में लगाए गए महंगे पौधे भीषण गर्मी और नियमित देखरेख के अभाव में सूखने लगे हैं। लाखों रुपए की लागत से तैयार की गई यह हरियाली परियोजना अब बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है, जिससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह पूरा प्रोजेक्ट शुरुआत में बेहद आकर्षक और शहर की सुंदरता बढ़ाने वाला लगा था, लेकिन कुछ ही समय बाद इसकी देखरेख व्यवस्था पूरी तरह ढीली पड़ गई। गर्मी के इस चरम दौर में जब पौधों को सबसे अधिक पानी और संरक्षण की आवश्यकता थी, तब जिम्मेदार विभाग की अनदेखी के कारण अधिकांश पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए, जबकि कई पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।

आकर्षक शुरुआत, लेकिन लापरवाही में बदली योजना

वार्डवासियों के अनुसार, नई सड़क के निर्माण के बाद नगर पालिका ने इसे मॉडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसी के तहत सड़क किनारे बड़े आकार के गमले रखे गए और उनमें महंगे सजावटी पौधे लगाए गए। शुरुआत में यह पहल लोगों को काफी पसंद आई और इसे शहर के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पहल के पीछे दीर्घकालिक देखभाल की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। पौधों को लगाने के बाद न तो नियमित सिंचाई की व्यवस्था रही और न ही कोई जिम्मेदार कर्मचारी इसकी निगरानी करता दिखा। नतीजा यह हुआ कि चिलचिलाती धूप और लू के बीच ये पौधे धीरे-धीरे सूखते चले गए।

लाखों की लागत, लेकिन रखरखाव शून्य

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि जनता के टैक्स से वसूली गई राशि का उपयोग जिन योजनाओं में किया जाता है, क्या उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उद्घाटन और दिखावे तक सीमित है? लोगों का कहना है कि लाखों रुपए खर्च कर पौधे और गमले खरीदे गए, लेकिन उनकी सुरक्षा और देखरेख के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।कुछ लोगों ने इसे ‘फोटो खिंचवाने वाली योजनाएंÓ बताते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट सिर्फ शुरुआत में चमकते हैं, लेकिन थोड़े ही समय में लापरवाही की भेंट चढ़ जाते हैं।

गर्मी बनी दुश्मन, सिस्टम की चुप्पी बनी बड़ी वजह

इस समय जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और तापमान में लगातार वृद्धि ने स्थिति और बिगाड़ दी है। ऐसे मौसम में पौधों को नियमित पानी देना अनिवार्य होता है, लेकिन टैगोर वार्ड में यह व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है। न तो टैंकर की नियमित आपूर्ति दिखाई दे रही है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी की सक्रियता।वार्ड के लोगों का कहना है कि जब पौधे सूखने लगे, तब भी कई दिनों तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे यह साफ होता है कि योजना को लेकर शुरुआती उत्साह तो था, लेकिन उसे बनाए रखने की इच्छाशक्ति और निगरानी दोनों कमजोर साबित हुईं।

जनता में नाराजगी, जांच की मांग तेज

स्थानीय रहवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि पौधों और गमलों की खरीदी में कुल कितना खर्च हुआ, और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसके पास थी।साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि जब शहर में पहले से ही जल संकट और गर्मी जैसी समस्याएं हैं, तब ऐसी योजनाओं के लिए क्या पहले से उचित तैयारी नहीं की जानी चाहिए थी?

हरियाली योजना या धन की बर्बादी? ‘अब स्थिति यह है कि जिस योजना को शहर की सुंदरता बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा था, वह धीरे-धीरे सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बनती जा रही है। सूखे पौधे न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, बल्कि यह भी दिखा रहे हैं कि बिना ठोस प्रबंधन के कोई भी योजना कितनी जल्दी दम तोड़ सकती है। फिलहाल टैगोर वार्ड की यह ‘हरियाली योजनाÓ चर्चा का विषय बनी हुई है—और लोग यही सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सच में विकास था, या फिर सिर्फ दिखावे की एक और अधूरी कहानी।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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