Betul News: मुख्यमंत्री कन्या विवाह की 741 वधुएं सरकारी दहेज से वंचित
Betul News: 741 girls of Chief Minister Kanya Vivah deprived of government dowry

विवाह, निकाह कराने वाले पुजारियों और मौलवियों को भी नहीं मिला मानदेय
Betul News: बैतूल। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का विवाह कर उन्हें आर्थिक संबल देना है। मगर विडंबना यह है कि योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर ही सवाल उठने लगे हैं। जनपद पंचायत बैतूल के अंतर्गत 2 मई को जिला मुख्यालय पर आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 741 कन्याओं (जोड़ों) का विवाह संपन्न कराया गया था। लेकिन साढ़े तीन माह बीत जाने के बावजूद अब तक इन हितग्राही कन्याओं को सरकारी दहेज की राशि नहीं मिल पाई है। यही नहीं, विवाह और निकाह संपन्न कराने वाले पुजारियों और मौलवियों को भी मानदेय से वंचित रखा गया है।
सरकारी सहयोग से उठ रहा हितग्राहियों का भरोसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस देरी के पीछे बजट आवंटन न होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, हितग्राहियों को राशि का भुगतान शुरू कर दिया जाएगा, इसके लिए नवनियुक्त सीईओ ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, लंबे समय से राशि का इंतजार कर रही कन्याओं और उनके परिवारों के लिए यह आश्वासन किसी संतोष का विषय नहीं है। गरीब परिवारों ने शादी के वक्त सरकारी सहयोग पर भरोसा किया था, लेकिन अब उन्हें कर्ज और आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। लिहाजा राशि मिलने में हुई देरी से सरकारी सहयोग से भी हितग्राहियों का भरोसा उठता जा रहा है।
जोड़ो को 49 हजार, पुजारी मौलवियों को दिया जाता है मानदेय
दरअसल मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत विवाह संपन्न कराने पर कन्या को गृहस्थी सामग्री सहित 49 हजार रुपए की राशि सरकार की तरफ से प्रदान की जाती है। इस सहायता से परिवार को नई जिंदगी की शुरुआत करने में सहूलियत होती है। लेकिन बैतूल जनपद की 741 कन्याओं के मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं का लाभ आखिर समय पर क्यों नहीं पहुंच रहा। योजना के हितग्राहियों और धार्मिक गुरुओं को मानदेय न मिलना प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण माना जा रहा है।
पुजारी और मौलवियों के लिए भी लगभग 10 से 15 हजार रुपए का मानदेय सरकार ने तय कर रखा है। अब धार्मिक गुरुओं समेत कन्याओं और उनके परिवारजन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी मंचों से गरीब बेटियों की शादी का दावा करने वाली सरकार को इस योजना की वास्तविकता पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
चिचोली , भीमपुर जनपद भुगतान कर हुए फारिग
इधर, जिले के अन्य जनपदों की स्थिति बैतूल से विपरीत रही है। भीमपुर जनपद पंचायत में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 775 कन्याओं का विवाह हुआ था। भीमपुर जनपद सीईओ नान सिंह चौहान ने बताया कि, इनमें से सभी हितग्राहियों को सरकारी राशि का भुगतान पूर्ण कर दिया गया है। वहीं, चिचोली जनपद सीईओ प्रतिभा जैन का कहना है कि, जनपद के अंतर्गत लगभग 1000 जोड़ो का विवाह संपन्न कराया गया था। पंचायत में लगभग 900 कन्याओं(जोड़ों)को राशि का भुगतान कर दिया गया है। जैसे जैसे हितग्राही आते जा रहे हैं उन्हें भुगतान किया जा रहा है।इतना ही नहीं, विवाह कराने वाले पुजारियों और मौलवियों को भी समय पर मानदेय उपलब्ध कराया गया है।
इस तुलना से यह साफ हो जाता है कि समस्या केवल बैतूल जनपद में है। सवाल उठता है कि जब एक ही योजना के तहत जिले के अन्य जनपद समय पर भुगतान कर सकते हैं, तो बैतूल में ही देरी क्यों हो रही है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर वित्तीय अनुशासन में गड़बड़ी?
योजना के हितग्राहियों और धार्मिक गुरुओं को मानदेय न मिलना प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण माना जा रहा है। कन्याओं और उनके परिवारजन अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी मंचों से गरीब बेटियों की शादी का दावा करने वाली सरकार को इस योजना की वास्तविकता पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह मामला जनआक्रोश का रूप भी ले सकता है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसे संवेदनशील कार्यक्रम की सफलता तभी संभव है जब प्रत्येक हितग्राही को समय पर उसका अधिकार मिले और कोई भी पुजारी, मौलवी या कन्या प्रशासनिक उदासीनता का शिकार न बने।
इनका कहना…
बजट के जल्द आवंटन के लिए शासन स्तर पर दो बार पत्राचार किया जा चुका है। जैसे ही बजट का आवंटन किया जाएगा, सभी हितग्राहियों को राशि का तत्काल भुगतान किया जाएगा
शिवानी राय, सीईओ जनपद पंचायत बैतूल




