Betul Samachar: अब प्रशासन ने भी माना माचना किनारे हुआ बेजा अतिक्रमण

सांझवीर की खबर के बाद एसडीएम के निर्देश पर दो लोगों को नोटिस जारी, ढहाया जाएगा अतिक्रमण
Betul Samachar: बैतूल। शहर में बढ़ती आबादी के साथ अवैध कालोनियों और शासन की जमीन पर कब्जा करने जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तथाकथित कालोनाइजर शासकीय जमीन को अपने कब्जे में लेकर आधिपत्य जता देते हैं, लेकिन अधिकारियों को खबर ही नहीं लग रही है। ताजा मामला शहर के लोहिया वार्ड स्थित माचना नगर में देखने को मिला है।
यहां हजारों वर्गफीट जमीन को समतल कर प्लाटिंग कर दी गई और स्थानीय अधिकारियों को खबर तक नहीं लगी। सांझवीर टाईम्स के पास आई शिकायत के बाद इस मामले की खबरें प्रकाशित की गई, तब राजस्व और नपा की टीम की नींद खुली। आनन-फानन में भूमि स्वामी रंगा पवार और अब्दुल हक खान को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। इस अवधि के बाद नदी किनारे का अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
माचना नगर में पिछले कई माह से नदी के किनारे स्थित भूखंडों पर कुछ भूमि स्वामियों ने अपनी जमीन बताकर बाउंड्रीवाल का निर्माण कर लिया है। कई माह से यह कवायद की जा रही, लेकिन न तो राजस्व और नपा के अधिकारियों को इस संबंध में भनक लगी। क्षेत्र के लोगों की शिकायत पर सांझवीर टाईम्स ने नदी की जमीन पर हुए अतिक्रमण के मामले को सामने लाया, तब राजस्व और नपा के अमले ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। इसके बाद खबर की सत्यतता पर भी मोहर लग गई है।
पहले नोटिस का जवाब नहीं, फिर दूसरा जारी
नपा ने माचना नदी के किनारे शासकीय भूमि पर कब्जा करने के मामले में भूमि स्वामी रंगा पवार और अब्दुल हक को 17 अप्रैल को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा था, लेकिन जवाब नहीं दिया गया। सांझवीर टाईम्स के गतांग में यह मामला सामने आने के बाद एसडीएम डॉ अभिजीत सिंह ने नाराजगी जताते हुए नपा के अधिकारियों को तत्काल संबंधितों को नोटिस कर राजस्व अमले को भी जांच करने के निर्देश दिए हैं।
इस बीच नपा ने 28 अप्रैल को रंगा पवार और अब्दुल हक को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि उनके द्वारा नदी की चौड़ाई से 15 मीटर की दूरी के भीतर भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किया है। यह मप्र नपा अधिनियम 1961 की धारा 187,223 का उल्लंघन है। जल स्थल, जलस्त्रोत और उच्चतम जल स्तर से 9 मीटर और नदी के मामले में 15 मीटर की दूरी के भीतर कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन नपा द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान इन नियमों का उल्लंघन पाया गया है।
इसके बाद नदी के किनारे से 15 मीटर के भीतर किया गया अतिक्रमण हटाने के लिए दोनों भू स्वामियों को 15 दिन का समय दिया है। इसके बाद नपा खुद अतिक्रमण हटाती है तो इसके एवज में होने वाला व्यय भी संबंधितों से वसूला जाएगा।
प्रशासन के अधिकारी ही मामले में उलझे
इस पूरे मामले में प्रशासन के अधिकारी ही उलझते नजर आ रहे हैं। इस मामले में जानकारी बताते हैं कि पहले तो इतने दिनों तक नदी के किनारे बाउंड्रीवाल बनाकर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद जब टीम जांच के लिए पहुंची तो सत्यता पाई गइ, लेकिन नोटिस के बाद जब जवाब नहीं आया तो तुरंत कार्रवई की जानी चाहिए थी। यह कहीं न कहीं भूमि स्वामियों को अवसर दिया जाना जैसा है।
दूसरा तर्क यह दिया जा रहा है कि शसाकीय रिकार्ड में भूमि स्वामी अपनी जमीन दिखा रहा है तो उन्हें पूर्व में कुछ अनुमतियां और प्रक्रिया इसके माध्यम से पूरी की। जानकारों का कहना है कि सांझवीर टाईम्स मामले को सामने नहीं आता तो माचना की हजारों फीट जमीन भू मामियाओं के कब्जे में चली जाती। पूरे मामले को लेकर नपा और राजस्व कर्मियों के तलमेल नहीं होने को लेकर खूब चर्चा हो रही है।
इनका कहना…
आपके द्वारा दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद नपा से शसकीय जमीन पर कब्जा करने वाले रंगा पवार और अब्दुल हक को नोटिस जारी किए हैं। नियत तिथि पर जवाब नहीं आने पर सख्ती से वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ अभिजीत सिंह, एसडीएम बैतूल
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