Betul News: महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी में बैतूल से एक भी पदाधिकारी नहीं

कांग्रेसियों का ही कटाक्ष- क्या 50 प्रतिशत महिलाओं के युग में चुनाव जीतेंगे?
Betul News: बैतूल। भाजपा के बाद कांग्रेस में प्रादेशिक कार्यकारिणी का गठन कर विधानसभा चुनाव के पूर्व तैयारियां शुरू की जा चुकी है। पूर्व सांसद प्रेम चंद गुड्डू की पुत्री रीना बौरासी को कुछ माह पहले ही प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सक्रियता का इनाम देते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था।
उन्होंने बीती रात प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। इसमें 66 पदाधिकारियों को प्रदेश उपाध्यक्ष, महा सचिव, सचिव , संयुक्त सचिव जैसे पदों पर नियुक्ति की है, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की कार्यकारिणी में पूरी तरह से उपेक्षा की गई। इसके अलावा सोशल मीडिया पर खुद कांग्रेसी ही कटाक्ष करने से नहीं चूक रहे हैं।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बौरासी ने अपनी जैम्बो कार्यकारिणी में बड़े महानगरों के अलावा छोटे जिलों को भी खासा महत्व दिया है। महानगरों में तो ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, भोपाल को हाईवोल्टेज तवज्जों दी गई, लेकिन बैतूल की बारी आई तो एक बार फिर कार्यकारिणी में झूंनझूना हाथ लग गया। दरअसल बैतूल जिले में कई ऐसी कांग्रेस नेत्रियां हैं जो हर मोर्चो पर सत्ता पक्ष का विरोध करने में आगे आती है। इसके बावजूद प्रदेश अध्यक्ष ने जिले से किसी भी महिला नेत्री को अपनी कार्यकारिणी में स्थान न देकर सीधे तौर पर उपेक्षा की है।
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बैतूल जैसे जिले का वजन इसलिए अधिक है, क्योंकि यहां आदिवासी वर्ग के लिए लोकसभा आरक्षित है। साथ ही संसदीय क्षेत्र की आठ में से 4 विधानसभा इसी वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। कार्यकारिणी में न तो इस वर्ग की और न सामान्य वर्ग की महिला कार्यकर्ता को स्थान दिया गया है।

सोशल मीडिया पर भी जमकर कटाक्ष
प्रदेश महिला कांग्रेस में बैतूल जिले की महिलाओं को स्थान न मिलने पर जमकर कटाक्ष किए जा रहे हैं। जिले की सक्रिय पत्रकार गौरी बालापुरे पदम ने भी महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में बैतूल को स्थान न दिए जाने पर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि बैतूल से एक भी महिला नेत्री का नाम नहीं है।
प्रदेश महिला कांग्रेस की इस सूची पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व जिला संगठन मंत्री स्पेंसर लाल ने अपनी ही पार्टी को आड़े हाथ लेते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि महिला कांग्र्रेेस में बैतूल से एक भी नाम नहीं। 50 प्रतिशत महिलाओं के युग में बिना इन्हें लिए चुनाव कैसे जीतेंगे?
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पांसे-डागा के गृह क्षेत्र में महिलाओं की उपेक्षा
जिले में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता हर आयोजन अपनी आवाज बुलंद करते आ रही है। उन्हें ऐसे आयोजन में विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस का झंडा बुलंद करते देखा गया। चौकाने वाली बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस के संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे और जिला कांग्रेस के पावरफुल अध्यक्ष निलय डागा के गृह क्षेत्र से एक भी महिला कांग्रेस कार्यकर्ता को प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान नहीं दिया गया।
सवाल यह है कि इनसे से भी प्रदेश अध्यक्ष से नाम मांगे थे या नहीं? वैसे जिले में मोनिका निरापुरे, जमुना पंडाग्रे, नंदनी तिवारी, पे्ररणा शर्मा, पुष्पा पंद्राम, राज रानी परिहार जैसी वरिष्ठ और आवाज बुलंद करने वाली महिला नेत्री मौजूद है। इनमें से किसी को भी प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान न दिए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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