Sanyojan Yojana: संयोजन योजना में 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला, सात साल तक सरकार को लगाया चूना

सरकारी विभागों के बिलों से खुला खेल, सीजीएसटी ने 50.93 लाख टैक्स और उतना ही दंड लगाया
Sanyojan Yojana: बैतूल। जिले में जीएसटी नियमों की अनदेखी और सरकारी भुगतानों में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने मैसर्स पंकज टेंट हाउस पर कार्रवाई करते हुए 50 लाख 93 हजार 522 रूपए जीएसटी की पुष्टि की है। ब्याज और समान राशि के दंड के साथ कुल देनदारी एक करोड़ से अधिक तय की गई है। विभाग द्वारा यह आदेश 25 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था और टेंट संचालक को अपील के लिए तीन महीने का समय दिया गया था, जो अब समाप्ति की ओर है।
यह कार्रवाई केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर प्रभाग-4 भोपाल के सहायक आयुक्त उदय आत्माराम चव्हाण द्वारा पारित मूल आदेश क्रमांक 14/AC/GST/ADJ/BPL-IV/25-26 के तहत की गई। विभागीय आदेश 25 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें टेंट संचालक को आदेश के खिलाफ अपील प्रस्तुत करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।

विभागीय जांच में सामने आया कि संबंधित फर्म संयोजन योजना के अंतर्गत पंजीकृत थी। इस योजना के तहत करदाता को ग्राहकों से जीएसटी वसूलने की अनुमति नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद फर्म द्वारा इवेंट मैनेजमेंट, मंडप कीपर, आउटडोर कैटरिंग और संपत्ति किराया जैसी सेवाओं पर लगातार 18 प्रतिशत जीएसटी ग्राहकों से वसूला गया और सरकार के खाते में जमा नहीं किया गया।
जांच के दौरान विभाग ने नगर पालिका, कॉलेज, पॉलिटेक्निक, कलेक्टोरेट सहित कई शासकीय संस्थानों से प्रमाणित चालान प्राप्त किए। इन दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि बिलों में जीएसटी अलग से दर्शाया गया था और भुगतान भी जीएसटी सहित लिया गया, लेकिन उक्त राशि शासन को जमा नहीं की गई।

शिकायत के बाद जब्त किए दस्तावेज
विभाग ने 28 अक्टूबर 2024 को जीएसटी अधिनियम की धारा 67 के तहत फर्म के यहां निरीक्षण किया था, जिसमें कई ढीले चालान और दस्तावेज जब्त किए गए। जांच के दौरान करदाता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि 18 प्रतिशत जीएसटी ग्राहकों से वसूला गया, जबकि सीएमपी-08 रिटर्न में केवल 6 प्रतिशत कर ही दर्शाया गया।
इसके बाद भी कर राशि जमा नहीं की गई और आवश्यक दस्तावेज विभाग को उपलब्ध नहीं कराए गए। विभाग ने इस पूरे मामले को तथ्यों का दमन, गलत घोषणा और जानबूझकर कर चोरी मानते हुए जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत कार्रवाई की। साथ ही 13 जून 2025 को जारी कारण बताओ नोटिस का निपटारा भी इसी आदेश के साथ कर दिया गया।
अन्य भुगतानों को लेकर भी सवालिया निशान
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों में किए गए भुगतानों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता कन्हैयालाल चौकीकर का आरोप है कि कई विभागों में बिलों के माध्यम से अनियमित भुगतान किए गए। कुछ मामलों में कार्य की अनुमानित लागत लगभग 20 लाख रुपये थी, जबकि भुगतान करीब 50 लाख रुपये तक किए जाने की जानकारी सामने आई है।
कई बिलों में 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़कर भुगतान लिया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त जीएसटी राशि वास्तव में शासन के खाते में जमा की गई या नहीं। मामले को लेकर कलेक्टर को भी लिखित शिकायत की गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच की औपचारिकता पूरी की गई, लेकिन जांच के दौरान शिकायतकर्ता को बुलाया नहीं गया और जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
15 वर्षों के रिकॉर्ड की जांच होने पर होंगे चौंकाने वाले खुलासे
शिकायतकर्ता कन्हैयालाल चौकीकर का कहना है कि यदि नगर पालिका में पिछले 10 से 15 वर्षों के टेंट हाउस से जुड़े बिलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। आरोप है कि विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के नाम पर टेंट हाउस के बिलों के माध्यम से बड़ी राशि का भुगतान किया गया, जिसकी वास्तविकता की गंभीर जांच नहीं हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकांश विभागों में भुगतान या ठेके से जुड़े मामलों में आयकर चुकता प्रमाण पत्र तो मांगा जाता है, लेकिन कई मामलों में जीएसटी चुकता प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाता। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूरे मामले से जुड़े बिल, दस्तावेज और अन्य प्रमाण उनके पास सुरक्षित हैं और निष्पक्ष जांच होने पर वे सभी प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।




