Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: आखिर क्यों चर्चा में है टीआई और विवादित एएसआई का मदिरा प्रेम?? साहब को मिली जिम्मेदारी पर करप्शन को लेकर क्यों चिंतित??? नम्बर 2 की हैसियत के बावजूद मैडम का रुतबा क्यों नहीं बढ़ रहा????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

टीआई-एएसआई का मदिरा प्रेम

एक थाने के टीआई का अपने से दो रैंक छोटे एएसआई के साथ मदिरा प्रेम इन दिनों पूरे विभाग में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शाम 7 से 8 बजे के बीच नवेले टीआई और एक विवादित एएसआई बंद पड़ी पुलिस चौकी में जाम छलकाते नजर आ सकते हैं। खबर है कि इसी चौकी के पास में एक दलाल चाय वाला भी सेवा में हाजिर हो जाता है। अति विवादित एएसआई के साथ यह थाना प्रभारी एक से डेढ़ घंटे तक अपना कोटा पूरा होने के बाद यहां से रवानगी डालते दिखाई देते हैं।

वैसे टीआई का यह शौक नया नहीं है। वे पहले भी इसी शौक के कारण सुर्खियां बटोर चुके हैं, लेकिन इस बार एएसआई के साथ जाम झलका रहे हैं, वे विवादित होने के कारण विभाग में इनके मदिरा प्रेम की चर्चाएं आम हो गई है। चर्चा यह भी है कि जाम छलकाने के लिए टीआई साहब से आग्रह कर लाइन से एएसआई को थाने लेकर गया था। यह वही टीआई है जिन्हें पहले एक प्रमुख थाने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन यहां विवाद के बाद उन्हें अपने पुराने और चंद किमी के फासले पर स्थिति दूसरे थाने की कमान सौंपी गई है।

कैसे कंट्रोल करेंगे करप्शन?

एक निकाय में दुबले पर दो आषाढ़ जैसी कहावत चरितार्थ हो रही है। दरअसल यहां आमदनी चवन्नी, खर्च रुपैया आम बात है। आउटसोर्स कर्मचारियों की भारी भरकम नियुक्ति कर वित्तीय हालत गड़बड़ाने में जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों का पूरा रोल है।

पिछले दिनों एक मामले में इसी निकाय के दो अधिकारियों पर गाज गिरी तो जिन्हें प्रभारी बनाया गया, वह भी खासे परेशान हो उठे। चर्चा है कि इस निकाय का जो हाल है उसे देखते हुए साहब कुछ कंट्रोल कर पाए, इस पर संशय जाहिर किया जा रहा है। साहब भले कड़क मिजाज है पर यहां की हालत देखकर अंदाजा लगा लिया। वैसे सीएमओ के निपटने से यहां के दो नंबर के हैसियत वाले 7-8 वर्ष से जमे वाले साहब और सफाई वाले एक साहब भी खासे खुश दिखाई दे रहे हैं।

नाममात्र की अधिकारी

जिला प्रशासन में इनका रूतबा तो दो नंबर का है, लेकिन पदस्थापना के बाद से उन्हें केवल औपचारिकता भर निभाते देखा जा रहा है। महिला अधिकारी होने के नाते वे सशक्त जरूरत, लेकिन उन्हें अक्सर बैठकों के अलावा अपने कार्यालय तक सीमित देखा जा रहा है। करीब एक वर्ष में जिला मुख्यालय में पदस्थ प्रमुख अधिकारी को कहीं पर भी जिले के भ्रमण पर नहीं देखा गया।

साहब यदि अवकाश पर जाए तो भी इन्हें प्रभार नहीं मिलता है। दरअसल पहले से ही जिले में एक बड़े अधिकारी मौजूद हैं, जिन्हें समय-समय पर जिम्मेदारी दी जाती है। इसी वजह मैडम का बैतूल में रहना या न रहना सभी एक जैसा ही मानते हैं। उन्हें केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करते ही कर्मचारी देखते आ रहे हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button