Betul Ki Khabar: पानी सहेजने में फेल हुई नपा, क्षतिग्रस्त पाइप लाइन से बह रहा लाखों लीटर पानी और फरवरी में लखापुर से लेना पड़ा पानी

माचना डेम सूखने की कगार पर, इसलिए लेना पड़ा पानी
Betul Ki Khabar: बैतूल। एक ओर जल संसाधन विभाग और नगर पालिका के संयुक्त प्रयास से ताप्ती नदी पर करीब सात करोड़ की लागत से नए बैराज के निर्माण का रास्ता साफ किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद खुद शहरी क्षेत्र में पानी की बर्बादी रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। शहर के व्यस्ततम इलाके थाना चौक से कमानी गेट के बीच पिछले दो महीनों से पाइपलाइन लीकेज बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदारों की नींद अब तक नहीं टूटी।

स्थानीय लोगों के अनुसार जैसे ही जलापूर्ति शुरू होती है, वैसे ही सड़क पर पानी की तेज धार बहने लगती है। सड़क कुछ ही देर में तालाब जैसी स्थिति में बदल जाती है। अनुमान है कि रोजाना हजारों लीटर पानी इस लीकेज से व्यर्थ बह रहा है। बावजूद इसके, न तो नगर पालिका के अधिकारी गंभीर हैं और न ही मैदानी कर्मचारी।

जानकारी होने के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह लीकेज कोई छिपी हुई समस्या नहीं है। इसकी जानकारी नगर पालिका को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी सुधार कार्य कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही। इससे साफ है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने का रवैया है। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस लापरवाही का सीधा असर आगामी गर्मी के मौसम में देखने को मिलेगा। जिस क्षेत्र में यह लीकेज है, वहां रहने वाले हजारों लोगों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इधर यह भी जानकारी सामने आई है कि ताप्ती नदी और प्रस्तावित बैराज में फिलहाल इतना स्टोरेज नहीं है कि पूरे गर्मी भर शहर को निर्बाध पानी मिल सके।
लाखापुर और गंगू डोह डेम पर निर्भरता
यदि हालात नहीं सुधरे तो नगर को लाखापुर और गंगू डोह डेम पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। ऐसे में हर बूंद पानी की कीमत और बढ़ जाती है, लेकिन नगर पालिका इसे सहेजने के बजाय सड़कों पर बहने दे रही है। सड़क पर इस तरह पानी की बर्बादी देख नागरिकों में नगर पालिका के प्रति भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि’दो माह से पानी सड़क पर बह रहा है।
अब तक हजारों लीटर पानी व्यर्थ हो चुका है। यदि समय रहते सुधार कर दिया जाता, तो यही पानी जल संकट के समय जनता के काम आता। नागरिकों का यह भी कहना है कि न तो अधिकारियों को जनता की फिक्र है और न ही जनप्रतिनिधियों को। अब जब चुनाव का समय आएगा तो जनता ही जनप्रतिनिधियों से इस लापरवाही का हिसाब मांगेगी। स्पष्ट है कि यदि नगर पालिका ने तत्काल पाइपलाइन सुधार कार्य नहीं कराया, तो आने वाले समय में पानी की यह बर्बादी शहरवासियों के लिए भारी संकट में बदल सकती है।

छपते-छपते… फरवरी में लाखापुर से लेना पड़ा पानी
गर्मी की अभी शुरुआत नहीं हुई और नगरपालिका को मंगलवार लाखापुर डैम की याद आ गई। माचना डैम का जलस्तर कम होते ही नपा को यहां से पानी छोड़ना पड़ा। सांझवीर के प्रकाशन के पूर्व जानकारी सामने आई है कि लाखापुर से छोड़ा गया पानी लगभग तीन से चार दिनों में माचना डैम तक पहुंचेगा। नगरपालिका की जलशाखा के अधिकारी और कर्मचारी इस पानी की पूरी निगरानी करेंगे।
बताया जाता है कि माचना डैम की ऊंचाई बढ़ाने के लिए तमाम जतन करने के बावजूद इस बार फरवरी के पहले सप्ताह में लाखापुर का पानी लेना पड़ गया। पिछले तीन माह से डैम के पानी से ही पूरे शहर में सप्लाई हो रही थी। हालांकि नपा के पास अभी ताप्ती बैराज से पानी लिए जाने का विकल्प भी बचा है। नपा की पहली प्राथमिकता गंगूडोह और लाखापुर से पानी लेकर शहर में सप्लाईकरना है। ताप्ती बैराज से पानी न लेने के पीछे भारी भरकम बिजली बिल की समस्या से भी नपा को फिलहाल छूटकारा मिला है।
इनका कहना..
माचना डैम का जलस्तर कम होने के कारण मंगलवार को लाखापुर से पानी लिया जा रहा है। करीब 1 एमसीएम पानी तीन से चार दिन में माचना डैम तक पहुंच जाएगा।
धीरेंद्र राठौर, जलशाखा प्रभारी नपा बैतूल




