Betul News: एसआईआर का बैतूल के बंगाली सुनारों पर असर

आधा दर्जन सुनार पश्चिम बंगाल रवाना, कार्रवाई के बाद मिला नोटिस, दस्तावेज खंगाल रहे पीड़ित
Betul News: बैतूल। पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया का असर स्थानीय स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर बैतूल में वर्षों से रहकर कारोबार कर रहे बंगाली सुनारों में भय का माहौल बन गया है। स्थिति यह है कि आधा दर्जन से अधिक बंगाली सुनार अपने परिवार सहित पश्चिम बंगाल रवाना हो चुके हैं, जबकि कई अन्य अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं।
नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बंगाली सुनारों का कहना है कि, उन्होंने पहले चरण की सभी कार्यवाही पूर्ण की थी । परिवार के अन्य सदस्यों के नामो पर तो आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारे नाम से नोटिस जारी किए गये हैं जिसके निराकरण के लिए वापस पश्चिम बंगाल जाना आवश्यक हो चुका है। दस्तावेजों के आधार पर उन्हें अपनी नागरिकता साबित करना पड़ेगा।
सूचना मिलते ही मचा हड़कम्प
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसआईआर के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और दस्तावेज जांच की प्रक्रिया के दौरान कुछ बंगाली मूल के सुनारों के नामों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई। यह सभी पिछले लम्बे समय से परिवार सहित बैतूल में रहकर सोने चांदी के आभूषण बनाने का $काम कर रहे हैं। एस ऐसी आर की प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए, जिसमें उनसे नागरिकता और निवास से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया। नोटिस मिलते ही सुनार समुदाय में हड़कंप मच गया।
20 से 30 वर्षों से काम के सिलसिले में हैं निवासरत
पीड़ित सुनारों का कहना है कि वे पिछले 20 से 30 वर्षों से बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में रहकर आभूषण निर्माण और बिक्री का काम कर रहे हैं। कई के पास स्थानीय निकायों द्वारा जारी पहचान पत्र, बिजली-पानी के बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। लेकिन मतदान के लिए वह हमेशा पश्चिम बंगाल स्थित पैतृक गांव जाते रहे हैं। इसके बावजूद अचानक आई इस कार्रवाई से वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
उनका कहना है कि, उनकी पत्नी सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर आपत्ति नहीं आई है। लेकिन केवल उनके नाम पर आपत्ति आना संशय की स्थिति निर्मित कर रहा है। ऐसे में अपने आप को देश का नागरिक घोषित करना आवश्यक हो चुका है। लिहाजा समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा हो सके इसके लिए पश्चिम बंगाल का रुख किया जा रहा है।
डिपोर्ट होने का सता रहा डर
कुछ सुनारों ने बताया कि नोटिस आने के बाद अब उन्हें यह डर सता रहा है कि यदि दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना गया तो उन्हें ‘बाहरी या ‘अवैध निवासी करार देकर डिपोर्ट किया जा सकता है। इसी आशंका के चलते आधा दर्जन से अधिक परिवार अपने मूल राज्य पश्चिम बंगाल लौट गए हैं, ताकि वहां से अपने पुराने रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और पारिवारिक दस्तावेज जुटा सकें। स्थानीय स्तर पर इस स्थिति का असर सुनार बाजार पर भी पड़ने लगा है। कई दुकानों पर काम प्रभावित हो रहा है या सीमित स्तर पर चल रहा है।
ग्राहक भी असमंजस में हैं, क्योंकि वर्षों से भरोसेमंद कारीगर अचानक गायब हो रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बाजार पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।हालांकि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही है और किसी को भी बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल बंगाली सुनार समुदाय के लोग नोटिस के बाद अपने-अपने दस्तावेज खंगालने में जुटे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जांच प्रक्रिया के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और उन्हें राहत मिल सकेगी।




