Betul Samachar: वन विभाग के करोड़ों के फर्जीवाड़े में रेंजर की लॉबिंग काबिले-तारीफ!

वर्षों से बैतूल में पदस्थ रेंजर हर डीएफओ का विश्वत सहयोगी कैसे बना?

Betul Samachar: बैतूल। वन विभाग के पश्चिम वनमण्डल में सामने आए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े ने पूरे महकमे के साथ साथ जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा का बाजार चिल्ला चिल्ला कर बोल रहा है कि, इस फर्जीवाड़े को काबू में करने के लिए बैतूल से राजधानी तक ऐसी तगड़ी सेटिंग की गई कि, मामला दब कर रह जाये लेकिन ऐसा हो नहीं सका, करीब 2 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपये के इस कथित घोटाले में जितनी चर्चा रकम की हो रही है, उतनी ही चर्चा उस रेंजर की मजबूत लॉबिंग की भी है, जिसने पूरे प्रकरण को लंबे समय तक पर्दे के पीछे बनाए रखा।

फर्जी वाड़े को दबाने के लिए रेंजर ने वो प्रत्येक पैंतरा आजमाया है, जिसमे उच्च विभाग के उच्च अधिकारियों पर भी अब उंगलियां उठती जा रही हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस फर्जीवाड़े में सिर्फ दाल में काला नहीं बल्कि ‘पूरी दाल कालीÓ है और अकेले एक-दो कर्मचारियों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता इस फर्जी वाड़े में अधिकारियों से लेकर अस्थाई आपरेटरों की भूमिका भी प्रभावी बताई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि यदि मामले की किसी अन्य जांच एजेंसी से पड़ताल कराई जाए तो फर्जीवाड़े का आंकड़ा कहीं ज्यादा सामने आएगा।लेकिन गुपचुप तरीके से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।

अस्थाई आपरेटरों पर सबसे ज्यादा भरोसा, फर्जीवाड़े के मेन मास्टर माइंड

सूत्र बताते हैं कि, इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन मण्डल में होने वाले कतिथ फर्जीवाड़े में उन आपरेटरों की विशेष भूमिका बताई जा रही है, जिन्हें अस्थाई तौर पर रखे जाने के नियम साफ हैं। पश्चिम वन मण्डल में आपरेटरों के रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, गोपनीय बैठकों में भी आपरेटरों की मौजूदगी पर संदेह जताया जा रहा है। जिन बैठकों में केवल वरिष्ठ अधिकारियों और जांच से जुड़े अफसरों को शामिल होना चाहिए था, वहां कथित तौर पर ऐसे लोग भी मौजूद रहे, जिनकी भूमिका तकनीकी या प्रशासनिक से अधिक ‘मैनेजमेंटÓ तक सीमित बताई जा रही है।

इससे यह सवाल और गहरा जाता है कि आखिर संवेदनशील सूचनाएं बाहर कैसे पहुंच रही थीं और जांच की दिशा पहले से कैसे तय की जा रही थी। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर को जांच की जिम्मेदारी के मिलने के तत्काल बाद आपरेटरों और रेंजर ने रात रात भर कार्यालय में बैठकर फर्जी वाड़े में लीपापोती की, और रिकार्ड में छेड़छाड़ कर सैकड़ों की संख्या में सबूतों से जुड़े बाउचरो को केम्पस में ही आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद जांच अधीकारियों ने जांच कर फर्जीवाड़े को क्लीन चिट दे डाली।

हम कदम , हम प्याले रेंजर पर तगड़ी सेटिंग ने बनाया बिगड़ा खेल

सूत्र बताते हैं कि डीएफओ यादव के कार्यकाल के दौरान एक हम कदम और हम प्याले रेंजर की पूरे मामले में पकड़ इतनी मजबूत रही कि ‘बाल भी बांका नहीं होने दियाÓ गया। शिकायतें आईं, फाइलें चलीं, उच्च अधिकारियों के मा$र्फत बकायदा चौसर बिछाई गई , और गंदगी को साफ करने के लिए बराबर समय लिया गया, फिर जांच का रुख बदल दिया गया। इस दौरान भुगतान, कार्यादेश, मस्टर रोल और सामग्री आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आते रहे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

निचले स्तर से उच्च स्तर तक तगड़ा नेटवर्क और लॉबिंग

बताया जा रहा है कि फर्जी बिल, कागजी कार्य और वास्तविक कार्य में अंतर दिखाकर रकम निकाली गई। जांच के नाम पर समितियां बनीं, लेकिन वे भी सीमित दायरे में सिमटकर रह गईं। अंदरखाने यह चर्चा है कि कतिथ रेंजर ने अपने नेटवर्क और लॉबिंग के जरिए न केवल निचले स्तर पर बल्कि ऊपर तक माहौल अपने पक्ष में बनाए रखा। यही वजह है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद जिम्मेदारी तय करने में देरी की गई।

अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी, या फिर हमेशा की तरह कुछ नामों पर कार्रवाई दिखाकर असली दोषियों को बचा लिया जाएगा। विभागीय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनधन की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि गोपनीय बैठकों की शुचिता, दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल हो। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह घोटाला सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगा और ‘काबिले-तारीफ लॉबिंगÓ एक बार फिर व्यवस्था पर भारी पड़ जाएगी।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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