Betul News: जिला प्रशासन के आदेश स्वदेशी मेले में हवा-हवाई
Betul News: District administration's orders go in vain at the Swadeshi fair

शादियों में डीजे पर पाबंदी, स्वदेशी मेले में तेज आवाज में बज रहा डीजे , सोशल मीडिया पर जबरदस्त आक्रोश
Betul News: बैतूल। विवाह समारोहों में रात 10 बजे के बाद डीजे साउंड पर सख्त प्रतिबंध का हवाला देकर कार्रवाई करने वाला जिला प्रशासन अपने ही सरकारी आयोजन में नियमों को ताक पर रखे हुए है। पुलिस ग्राउंड में लगे स्वदेशी मेले में हर रात तेज आवाज़ वाले साउंड सिस्टम देर तक बजते हैं, जिससे आसपास के नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। प्रशासन की यह दोहरी कार्यशैली अब लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बन गई है।
हाल ही में पुलिस ने देर रात तक बज रहे डीजे साउंड पर कई कार्रवाईयां की हैं। डीजे मशीन जप्त कर चालानी कार्यवाही भी की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि रात्रि 10 बजे के बाद किसी भी निजी कार्यक्रम में तेज आवाज़ वाला साउंड बजता मिला तो कठोर दंड दिया जाएगा। इन मामलों में अधिकारी न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए सख्ती दिखाते आए हैं, लेकिन इसी आदेश का पालन जब पुलिस ग्राउंड में लगे सरकारी मेले में होना चाहिए, तब जिम्मेदार चुप्पी साध लेते हैं। रात देर तक कानफोड़ू साउंड बजता रहता है, मानो सरकारी कार्यक्रम में कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।

आम जनता पर नियमों का बोझ
लोगों का कहना है कि नियम केवल आम जनता के लिए ही लागू हैं। नागरिकों पर सख्ती, जबकि प्रशासन खुद नियम तोड़ने में आगे है, यही मानसिकता लोगों की नाराजगी का बड़ा कारण बनी हुई है। पड़ोस में रहने वाले परिवार, विद्यार्थी और बुज़ुर्ग देर रात तक साउंड से परेशान रहते हैं। शहर की शांति भंग होने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर रोकथाम करने नहीं पहुंचता।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
प्रशासन की इस नीति पर लोग अब सोशल मीडिया के माध्यम से खुलकर विरोध जता रहे हैं। रविन्द्र सोनी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि सुना है कि शादियों में बजने वाले साउंड से प्रशासन को परेशानी होती है, और पुलिस ग्राउंड में बजने वाला साउंड खुशियाली देता है। पोस्ट पर कई लोगों ने इस तंज का समर्थन करते हुए कमेंट किए। इसी तरह विशेष व्यास महाराज ने लिखा न्यायालय के आदेश की अवमानना रात 10 बजे के बाद हाई डिसेबल पर बज रहा है साउंड। माननीय महोदय आदेश का पालन करवाना आपका कर्तव्य है। इन पोस्ट पर लगातार प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं और लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शहरवासियों का मानना है कि नियम केवल निजी आयोजनों तक सीमित नहीं होने चाहिए। जब प्रशासन न्यायालय के आदेशों का पालन कराने में इतना सख्त है, तो उसे स्वदेशी मेले में भी वही सख्ती दिखानी चाहिए। लोगों की मांग है कि सरकारी और निजी आयोजनों में एक समान नियम लागू हों।
कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि
स्वदेशी मेले जैसे सरकारी आयोजनों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण नियमों की अनदेखी की जा रही है। विवाह समारोह में साधारण लोग जुड़ते हैं, वहीं मेले के मंच पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि ऐसे में नियमों का तराज़ू किस पक्ष में झुक रहा है, यह साफ नजर आ रहा है। क्षेत्रवासियों ने कहा कि यदि प्रशासन देर रात साउंड रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मेले की तेज आवाज़ से परेशान लोग चाहते हैं कि तुरंत नियंत्रण किया जाए और न्यायालय के आदेशों का ईमानदारी से पालन हो।
इनका कहना…
पुलिस ग्राउंड में बज रहे साउंड को भी देर रात तक नहीं बजने दिया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा करता हूॅ।
वीरेन्द्र जैन, एसपी बैतूल




