Betul News: वन विभाग में पहले भी हुआ 12 लाख का गबन
Betul News: 12 lakh rupees were embezzled in the forest department earlier too

आपरेटर और लेखापाल की करतूत उजागर, फिर भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में
Betul News: बैतूल। वन विभाग में ऑपरेटरों और लेखापाल की मिलीभगत से सरकारी राशि को फर्जी खातों में ट्रांसफर करने का मामला फिर सुर्खियों में है। तत्कालीन मुख्यवनसंरक्षक पीजी फुलझेले द्वारा 10 ऑपरेटरों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभागीय अधिकारी उन निर्देशों को भी ठंडे बस्ते में डाल चुके हैं। न तो किसी ऑपरेटर पर कार्रवाई हुई और न ही वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को तवज्जो दी गई।
2023 में हुआ था बड़ा घोटाला
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में उत्तर वन मण्डल में ऐसा ही मामला सामने आया था। उस समय कम्प्यूटर ऑपरेटर अलकेश कवड़े और लेखापाल राधेलाल पवार ने मिलकर करीब 12 लाख रुपये अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। यह पैसा उन मजदूरों की मजदूरी का था, जिन्होंने विभागीय कार्यों में पसीना बहाया था। शिकायत के बाद तत्कालीन डीएफओ डाबर ने जांच कराई। जांच में खुलासा हुआ कि मजदूरों के खातों में रकम भेजने के नाम पर तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर रकम विभागीय खाते में वापस आ गई थी। इसके बाद यह पैसा चुपचाप फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस खुलासे के बाद डीएफओ ने तत्काल कार्रवाई की थी—लेखापाल को स्थानांतरित किया गया और ऑपरेटर को पद से हटाकर उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। यह मामला आज भी न्यायालय में लंबित है।
मजदूरों की खून-पसीने की कमाई पर डाका
इस घोटाले से यह साफ हुआ कि जिन मजदूरों ने विभाग के लिए काम किया, उनकी मेहनताना रकम को ही हड़प लिया गया। यह न केवल भ्रष्टाचार है बल्कि मानवता के खिलाफ भी अपराध है। सूत्रों का कहना है कि आज भी उत्तर, दक्षिण, पश्चिम और उत्पादन वन मंडलों में वर्षों से जमे हुए करीब 10 ऑपरेटरों पर गड़बड़ी का साया मंडरा रहा है। इनसे अब तक कोई पूछताछ तक नहीं की गई।
आशंका जताई जा रही है कि इतने कम समय में इन ऑपरेटरों ने जो रसूख और दबदबा हासिल किया है, उसके पीछे भी आर्थिक गड़बड़ी की कहानी छिपी हो सकती है। सूत्रों का दावा है कि यदि शासन स्तर से पिछले दो-तीन वर्षों में इन मंडलों के जरिए हुए भुगतानों की जांच कर ली जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा।




