Bamboo Auction Fraud: बांस नीलामी में लाखों का फर्जीवाड़ा, शाहपुर रेंज उत्पादन और भौरा डिपो शक के दायरे में
Bamboo Auction Fraud: Lakhs of rupees fraud in bamboo auction, Shahpur Range production and Bhaura depot under suspicion

नीलामी प्रस्तावित होने के बावजूद करवा दी री बंडलिंग
Bamboo Auction Fraud: बैतूल। शाहपुर रेंज के उत्पादन और भौरा डिपो में बांस नीलामी के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, नीलामी के लिए तय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दो मीटर लंबे बांस के बंडलों की जगह डेढ़ मीटर के बंडल तैयार किए गए। इससे बांस की मात्रा और गुणवत्ता में सीधा अंतर आ गया, जब गलती सामने आई तो पूरे मामले की लीपापोती शुरू की गई। नीलामी प्रस्तावित होने के बावजूद आनन फानन में डिपो के भीतर ही बंडल खुलवाकर साइज के हिसाब से नए बंडल बनवा दिए गए।
सूत्रों बताते हैं कि इस मामले में शासन को लाखों रुपयों की चपत लगाई गई है। जबकि नियम के मुताबिक री बंडलिंग कराने के लिए उच्च अधिकारियों की अनुमति लेना आवश्यक है, लेकिन अधीकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई, और छोटे साहब की देखरेख में गुपचुप तरीके से पूरे फर्जी वाड़े को अंजाम दे दिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शाहपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत प्रस्तावित नीलामी के लिए बांस कटाई करवाई गई थी। बताया जा रहा है कि दो मीटर के बांसों की कटाई कर इनके बंडल बनाये जाने थे। लेकिन डेढ़ मीटर लंबाई के बांसों की कटाई कर इनके बंडल बनाकर भौरा डिपो को परिवहन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि, नीलामी के लिए 10-10 बांसों का एक बंडल बनाया जाता है। डिपो में इन बंडलों की थप्पी लगाई जाती है। एक थप्पी में बांस के करीब 2 हजार बंडल रखे जाते हैं। इस तरह से डिपो में करीब 50 से 60 थप्पी लगाई गई थी।
सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों ने बांस की कटाई करने , बंडल बनवाने और परिवहन करवाने में लाखोँ रुपयों का भुगतान कर दिया। जब बांसों के सैकड़ो बंडल डिपो पहुंचे तो गलती सामने आ गई। लिहाजा पूरे मामले की लीपापोती शुरू कर दी गई। और बिना डीएफओ की अनुमति लिए गुपचुप तरीके से लाखोँ की संख्या में रखे बांसों की छटाई शुरू कर दी गई। और जितना खर्च कूप में किया गया था, उससे कहीं अधिक खर्च डिपो में री बंडलिंग कर दोबारा कर दिया गया, जो सीधे सीधे सरकारी राशि का दुरुयोग की श्रेणी में नजर आ रहा है।
यह प्रक्रिया न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे नीलामी के बाद बांस के माप में फेरबदल कर कीमत और मात्रा में हेराफेरी की आशंका भी गहरी हो जाती है। सूत्रों बताते हैं कि, नीलामी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बंडल की लंबाई और संख्या का सटीक रिकॉर्ड होना जरूरी है, लेकिन यहां दोनों में ही गड़बड़ी पाई गई। बांस की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई, जिससे बाजार मूल्य ओर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे मामले में शाहपुर रेंज और भौरा डिपो के जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जिसकी विभागीय जांच जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह लापरवाही थी या संगठित रूप से किया गया फर्जीवाड़ा।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला वन विभाग के लिए बड़ी प्रतिष्ठा पर आंच ला सकता है। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह खेल खेला गया। फिलहाल, उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश के साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इनका कहना….
मामला मेरे संज्ञान में आया है, डीएफओ से चर्चा कर जांच के लिए कहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।
वासु कनोजिया, मुख्यवनसंरक्षक वन व्रत बैतूल




