Betul News: शहर में उगी नई पौध: मजदूर माफिया सक्रिय
Betul News: New saplings grow in the city: Labor mafia active

मजदूरी पर माफियाओं का कब्जा, आम जनता पर दोहरी मार
Betul News: बैतूल। माफिया शब्द जहां भी आता है, वहां भय और अव्यवस्था का माहौल स्वत: बन जाता है। रेत, खनिज और भू माफियाओं के बाद अब बैतूल शहर में एक नई समस्या उभर कर सामने आई है — मजदूर माफिया। इन दिनों शहर के प्रमुख स्थलों पर मजदूरों को अपनी गिरफ्त में लेकर अदृश्य माफिया मजदूरी दरें तय कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मजदूरी दरें तय, मनमानी वसूली
पीडब्ल्यूडी चौक और रैन बसेरा के आसपास सुबह-सुबह मजदूर बड़ी संख्या में काम की तलाश में जुटते हैं। लेकिन अब इन स्थानों पर कुछ स्थानीय मजदूर माफियाओं ने पूरी व्यवस्था पर कब्जा जमा लिया है। ये माफिया स्वयं को मजदूरों के ठेकेदार बताकर मजदूरी दरें निर्धारित कर रहे हैं। मजदूरी की दर 500 से 600 रुपए प्रतिदिन तय कर दी गई है, और इससे कम पर मजदूर मिलने की कोई संभावना नहीं है। यदि कोई मजदूर कम मजदूरी पर काम करने की कोशिश करता है तो उसे माफियाओं के गुस्से का सामना करना पड़ता है।

सिंडिकेट का संचालन और शोषण का खुलासा
सूत्रों के अनुसार, इन माफियाओं ने मजदूरों का एक संगठित सिंडिकेट बना रखा है। मजदूरी में 60:40 का अनुपात तय है — मजदूर को 60 प्रतिशत मजदूरी दी जाती है जबकि 40 प्रतिशत सीधे माफियाओं की जेब में चला जाता है। मजदूर माफियाओं के डर से खुलकर कुछ भी कहने से कतराते हैं।
विकास कार्यों और जनता पर सीधा असर
छोटे निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का कहना है कि मजदूर माफियाओं की इस मनमानी का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। आम नागरिकों को भी अपने घरों और अन्य कार्यों के लिए मजदूरों को मनमानी मजदूरी देनी पड़ रही है। ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि मजदूरी का यह कृत्रिम संकट ऐसे ही बना रहा तो निर्माण कार्य महंगे होंगे और देरी से पूरे होंगे।




