Betul Samachar: गबन करने वालों की प्रशासन में पकड़ से मिला प्रोत्साहन
Betul News: Embezzlers got encouragement due to their hold in administration

किसी को कलेक्टर ने दिया प्रमाण पत्र तो किसी के खाते में डली लाखों की राशि, जनप्रतिनिधियों ने फिर उठाए सवाल
Betul Samachar: बैतूल। अंधा बांटे रेवड़ी, चिन-चिन कर दें की तर्ज पर जिले की चिचोली और भीमपुर जनपद में करोड़ों रुपए के वारे न्यारे कर दिए, लेकिन अधिकारियों को खबर तक नहीं लगी। कई अपनों को भी गबन करने वालों को उपकृत कर दिया। यही वजह है कि उनकी प्रशासन में इतनी पकड़ थी कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में करोड़ों के घोटाले करने वाले ब्लाक समन्वयक राजेंद्र परिहार की तत्कालीन कलेक्टर ने प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित कर दिया। इससे उसके और हौसले बुलंद हो गए। वहीं भाजपा की ओर से जनपद पंचायत अध्यक्ष की चुनाव लड़ने वाली सपना इवने को भी 44 लाख रुपए की राशि देकर उपकृत कर दिया गया। यह वहीं जनपद सदस्य है जिसका फाइनेंसर बनकर गबन के मुख्य आरोपी और भीमपुर ब्लाक के करोड़पति सचिव जगदीश ने अध्यक्ष का चुनाव लड़वाया था। इस पूरे मामले के गोलमाल पर एक बार फिर शाहपुर जनपद के उपाध्यक्ष ने सवाल उठाकर अपनी ही पार्टी के नेताओं को नसीहत दी है।
चिचोली और भीमपुर जनपद में 13 करोड़ 21 लाख से अधिक के गबन में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले ्र4-5 वर्षों से चिचोली जनपद पंचायत में सबसे अधिक राशि डाली गई। यह राशि अन्य बड़ी जनपदों की अपेक्षा काफी अधिक बताई जा रही है। इसी वजह गबन करने वालों को यहां पर खुलकर खेलने को मिला। ब्लाक समन्वयक राजेंद्र परिहार और यहां के कंप्यूटर आपरेटर सुरकेश के बाद भीमपुर जनपद तक यह मामला पहुंचा तो यहां के भी कंप्यूटर के आपरेटर सुमित सोनी ने हाथ साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
शासकीय राशि का दुरुपयोग करने वाली तथाकथित गैंग ने अपने अफसरों की निगरानी में चार साल में बड़े पैमाने पर राशि का हेरफेर किया। जब पानी सिर के ऊपर से चला गया तब इस मामले का जांच के बाद खुलासा हुआ है, लेकिन जिस अधिकारी ने जांच की है वही संदेह के दायरे में आ गई है। दरअसल मुख्य किरदार को क्लिनचिट देने पर न सिर्फ आम लोग बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के ही पदाधिकारी आड़े हाथों लेने से नहीं चूक रहे हैं। इससे भाजपा की जमकर किरकिरी हो रही है। कांग्रेस भी इस मामले में भाजपा को घेर चुकी है। यह भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि करोड़ों के गबन का असर आने वाले चुनाव में भाजपा को बड़े पैमाने पर उठाना पड़ सकता है।
उपकृत करने का ऐसा चला सिलसिला
जानकार सूत्रों ने बताया कि चिचोली और भीमपुर गैंग बनाकर शासकीय राशि की हेरफेर करने वाले ब्लाक समन्वयक और कंप्यूटर आपरेटर समेत अन्य लोगों ने मलाई खाने के लिए अधिकारियों से सांठगांठ की। इसी का नतीजा है कि करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आया तो वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा के जनप्रतिनिधियों की ही आंखे फटी रह गई। इस मामले में चार वर्ष से गड़बड़झाले का किरदार निभाने वाले चिचोली के ब्लाक समन्वयक राजेंद्र परिहार की अपने जनपद सीईओ से इतनी गजब की पकड़ थी की वे शासकीय राशि का हेरफेर करते रहे और स्थानीय जनपद सीईओ की अनुशंसा पर उन्हें उपकृत किया जाते रहा।
इसका उदाहरण वर्ष 2023-24 में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया है। तत्कालीन कलेक्टर अमनबीर बैंस ने यह प्रशंसा पत्र ओडीए प्लस और ओडीएफ बनाए जाने में सराहनीय कार्य पर दिया था। इसी तरह जनपद सदस्य और भाजपा की ओर से चिचोली में जनपद अध्यक्ष का चुनाव में पराजित सपना इवने का भी है। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने भी गबन के तथाकथित आरोपियों और भीमपुर क्षेत्र के एक नामी करोड़पति सचिव की मदद से अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उपकृत होने की बात आई तो स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत उन्हें भी 44 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया। इसके बाद भाजपा की ग्रामीण मंडल की अध्यक्ष के खिलाफ भी प्रशासन ने एफआईआर की है।
जांच से खुश नहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता
घोड़ाडोंगरी विधानसभा के बीजादेही मंडल के पूर्व अध्यक्ष और शाहपुर जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष विशाल सिंह ठाकुर तेज तर्रार होने के साथ ज्वलंत मुद्दों पर आवाज मुखर करने के लिए जाने जाते हैं। चिचोली में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर वे जिला पंचायत के ही अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कई तकनीकी जानकारी दी है जो वास्तव में सही कही जा सकती है। उदाहरण देते उन्होंने बताया कि शाहपुर जनपद की पावरझंडा पंचायत में 72 लाख का गबन हुआ था।
उस आरोपी को बचाने के लिए जिला पंचायत द्वारा तीन बार जांच कराई गई। उनका मानना है कि इसके बाद आरोपी को खुश करने के लिए जांच अधिकारी को ही आरोपी बना दिया गया, जबकि वे उस समय वहां पर पदस्थ ही नहीं थे। यह एक महज उदाहरण था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो गबन का मामला चल रहा है। उसमें प्रथम दृष्टया बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को आरोपी बना दिया है जो जिला पंचायत में जांच करती है, वह केवल आरोपी को बचाने का प्रयास है। उनके इस गंभीर आरोप से जिपं के जांच करने वाले अधिकारी ही कटघरे में आ खड़े हुए हैं।




