Betul Samachar: किसानों के खातों में कब आएगा पैसा? फीकी दिवाली का सता रहा डर
तीन दिन बाद दिवाली, किसानों के हाथ खाली तो बाजार में भी सन्नाटा!

Betul Samachar: बैतूल। दीपावली का त्योहार नजदीक है और कृषि उपज मंडी में मक्का की बंपर आवक हो रही है। किसानों को उम्मीद है कि अपनी उपज बेचकर मिलने वाली राशि से वे परिवार के लिए दीपावली की खुशियां खरीद सकेंगे, लेकिन मंडी में फसल बेचने के दो से तीन दिन बाद भी कई किसानों को भुगतान नहीं मिल पाया है।
ऐसे में किसानों की दीपावली की खुशियां उनके बैंक खातों में आने वाले पैसों पर टिकी हुई हैं। यदि दीपावली के पहले किसानों को उनकी उपज का मूल्य मिल जाता है तो न केवल ग्रामीण परिवारों में त्योहार की रौनक बढ़ेगी, बल्कि बाजारों में भी खरीदारी का उत्साह नजर आएगा।
मंडी में मक्का की बंपर आवक के चलते व्यापारियों के सामने भी खरीदी गई उपज का भुगतान करने की चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक कई किसानों की फसल बिके दो से तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें भुगतान नहीं मिला है।
किसान व्यापारियों के चक्कर लगा रहे हैं। किसान रूपचन्द्र बिहारे, दिनेश यादव, राजेन्द्र पवार एवं कलीराम देशमुख का कहना है कि उपज बेचने के बाद किसानों को दीपावली की तैयारियां करनी हैं। कपड़े, मिठाई, घरेलू जरूरतों और बच्चों की खुशियों के लिए पैसों की जरूरत है। भुगतान आज नहीं तो कल मिल जाएगा, लेकिन दीपावली निकल जाने के बाद राशि मिलने का क्या फायदा?
सरकारी कर्मचारियों के वेतन से ही बाजार में रौनक
दीपावली में अब केवल तीन दिन शेष हैं। बाजारों में कपड़े, जूते-चप्पल, मिठाई और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक किया जा चुका है, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप ग्राहकी नजर नहीं आ रही है।
व्यापारियों की मानें तो अभी बाजार में खरीदारी का बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन के भरोसे है। किसानों और ग्रामीण परिवारों की बाजार में आमद अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। यही वजह है कि दुकानदारों को उम्मीद के मुताबिक व्यापार नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का भुगतान बना बाजार की रौनक की चाबी
बैतूल का बाजार केवल शहर के उपभोक्ताओं से नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और किसान परिवारों की खरीदारी से भी गुलजार होता है। मक्का की बंपर आवक के बीच यदि किसानों को समय पर उनकी उपज का भुगतान हो जाए तो इसका सीधा असर बाजार की ग्राहकी पर दिखाई दे सकता है।
किसानों के घरों में दीपावली की खुशियां बढ़ेंगी तो व्यापारियों के कारोबार को भी गति मिलेगी। अब सवाल यही है कि मंडी में अपनी उपज बेच चुके किसानों के खातों में दीपावली के पहले पैसा पहुंचता है या इस बार भी कई किसान आर्थिक तंगी के बीच त्योहार मनाने को मजबूर होंगे।




