Betul Samachar: 31 अक्टूबर को बैतूल को मिल सकती हैं दो बड़ी सौगातें!
सूखाग्रस्त जिले और नगर निगम की घोषणा पर टिकी निगाहें, सीएम डॉ. मोहन यादव के दौरे से बढ़ीं उम्मीदें

बैतूल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 31 अक्टूबर को बैतूल आगमन जिले के लिए कई मायनों में अहम साबित हो सकता है। आधिकारिक कार्यक्रम तेंदूपत्ता बोनस वितरण का है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में दो बड़ी घोषणाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री बैतूल को नगर निगम बनाने और जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के संबंध में महत्वपूर्ण ऐलान कर सकते हैं। हालांकि इन दोनों घोषणाओं की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बैतूल शहर को नगर निगम बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर पिछले चार महीनों से नगरपालिका और राजस्व विभाग की ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर की अनुशंसा के बाद प्रस्ताव नगरीय प्रशासन विभाग, भोपाल पहुंच चुका है। ऐसे में अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो 31 अक्टूबर का दिन बैतूल शहर के विकास के लिहाज से ऐतिहासिक हो सकता है।
अल्पवर्षा से बेहाल किसानों को राहत की उम्मीद
दूसरी बड़ी उम्मीद जिले को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने को लेकर है। इस साल अल्पवर्षा ने खेती-किसानी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फसलों को नुकसान पहुंचा है और आगामी फसल की तैयारी को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है। जलाशयों में कम पानी और गिरते जलस्तर के कारण आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका भी बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, सूखे की स्थिति को लेकर शासन स्तर पर जिन जिलों की समीक्षा की गई, उनमें बैतूल भी शामिल है। ऐसे में मुख्यमंत्री की घोषणा से प्रभावित किसानों और आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सूखाग्रस्त घोषित होने पर क्या मिल सकती है राहत?
सूखे की आधिकारिक घोषणा के बाद पात्र किसानों को फसल क्षति के मानकों और लागू सरकारी प्रावधानों के अनुसार कृषि आदान-अनुदान मिल सकता है। कृषि ऋणों के पुनर्गठन, भू-राजस्व में छूट, पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था, पशुओं के लिए चारा और रोजगार संबंधी अतिरिक्त राहत पर भी निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक सुविधा स्वत: लागू नहीं होती; इसके लिए शासन के अलग-अलग आदेश और पात्रता के नियम प्रभावी रहेंगे।
अब 31 अक्टूबर पर टिकी निगाहें
एक तरफ नगर निगम बनने से शहरी विकास की नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ सूखाग्रस्त घोषित होने से किसानों को राहत मिलने की आस है। अब देखना होगा कि तेंदूपत्ता बोनस वितरण के मंच से मुख्यमंत्री जिले को ये दो बड़ी सौगातें देते हैं या इन पर फैसला आगे के लिए टलता है।




