Politics: राजनीतिक हलचल: रात की मुलाकात, सुबह तक मामला शांत होने का आखिर क्या है माजरा?? कौनसे नेताजी है, जो अक्ल की अजीर्ण बने?? किस माननीय के नाम फर्जी नेता सरकारी दफ्तरों में दे रहा धौंस???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

रात की मुलाकात, सुबह तक मामला शांत!
सियासी गलियारों में इन दिनों एक रात की मुलाकात खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि दो दिन पहले रात में संघ से जुड़े एक प्रमुख पदाधिकारी को उनके ही क्षेत्र में एक महिला के साथ कुछ स्वयंसेवकों ने पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर ही मामला गरमा गया और बात आगे बढ़ने की चर्चा भी रही। हालांकि, बाद में मामला कथित तौर पर आपसी स्तर पर ही शांत कर दिया गया।
दिलचस्प यह है कि संबंधित पदाधिकारी का नाम इससे पहले भी उसी क्षेत्र में हुए एक बड़े विवाद के दौरान सुर्खियों में आ चुका है। उस समय भी स्थिति काफी गरमाई थी और मामला संगठन के लिए असहज स्थिति तक पहुंचने की चर्चा थी।
अब ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर चौक-चौराहों से लेकर संगठन के अंदरखाने तक कानाफूसी शुरू हो गई है। सवाल यह है कि आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि मामला पकड़े जाने के बाद भी सुबह तक सब कुछ शांत हो गया? फिलहाल चर्चाओं का बाजार गर्म है और जवाबदार खामोश।
अक्ल का अजीर्ण बने नेताजी
गांधी जयंती पर बापू को श्रद्धांजलि देने की होड़ में सोशल मीडिया के एक नेताजी ने ऐसा ज्ञान बघारा कि श्रद्धांजलि भी शायद सोच में पड़ गई होगी। नेताजी के पोस्ट को देखकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि यदि थोड़ा पढ़-लिख लिया होता तो शायद इतना तो पता रहता कि महात्मा गांधी जैसे दिवंगत महापुरुष की जयंती पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
खैर, सोशल मीडिया के दौर में ज्ञान से ज्यादा आत्मविश्वास जरूरी माना जाता है! वैसे नेताजी की चर्चा सिर्फ उनके ज्ञान को लेकर नहीं है। विपक्षी दल के जिला प्रमुख को लेकर उनकी लंबी चुप्पी भी इन दिनों राजनीतिक गलियारों में खूब फुसफुसाहट पैदा कर रही है।
विरोधी इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं और यहां तक कहा जा रहा है कि नेताजी कहीं अपनी ही ‘पेड ट्रोल आर्मी के ऑफ द रिकॉर्डÓ सिपाही तो नहीं बन गए हैं? सियासत में खामोशी भी बहुत कुछ कहती है कि बस सुनने वाले कान और समझने वाली अक्ल चाहिए!
माननीय के नाम की धौंस
सियासत में माननीय का नाम कई बार काम से ज्यादा काम कराने के लिए इस्तेमाल होता है। जिले के एक पावरफुल माननीय के नाम की ऐसी ही धौंस इन दिनों कुछ युवा नेताओं के बीच चर्चा में है। गलियारों में कानाफूसी है कि साहब की व्यस्तता का फायदा उठाकर एक तथाकथित नेता सचिन शुक…… कुछ शासकीय दफ्तरों में अपनी नेतागिरी का रौब दिखाने पहुंच रहे हैं।
कर्मचारी भी इस कथित धौंस से परेशान बताए जा रहे हैं, हालांकि धौंस आखिर किस बात की है और किस अधिकार से दिखाई जा रही है, यह फिलहाल साफ नहीं है। दिलचस्प यह है कि जिन माननीय के नाम का सहारा लिया जा रहा है, वे इस तरह की कार्यशैली को लेकर सख्त माने जाते हैं।
ऐसे में सवाल यही है कि नाम माननीय का है या फिर इस्तेमाल कोई और कर रहा है? सरकारी दफ्तरों में इन दिनों चर्चा यही है कि नेताजी को इतनी ताकत आखिर मिली कहां से? अब देखना है कि यह धौंस कब तक चलती है और माननीय तक इसकी खबर कब पहुंचती है।




