Betul News: शटर डाउन….. फिर भी दिन- रात रोशन आजीविका कांप्लेक्स

29 में से अधिकांश दुकानें खाली,हैलोजन लाइटों के बिजली बिल पर उठ रहे गंभीर सवाल
Betul News: बैतूल। बस स्टैंड के पास जिला पंचायत के आजीविका कॉम्प्लेक्स में रातभर जलती रोशनी व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। कॉम्प्लेक्स की अधिकांश दुकानें बंद हैं। कई दुकानों का अभी हैंडओवर तक नहीं हुआ है, इसके बावजूद रात के समय पूरे परिसर में हेलोजन लाइटें जलती रहती हैं।
ऐसे में जब सरकार बिजली बचाने और ऊर्जा संरक्षण का संदेश दे रही है, तब खाली और बंद दुकानों वाले कॉम्प्लेक्स में रातभर बिजली खर्च होने को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
29 दुकानें तैयार, 8 की नीलामी… फिर भी कारोबार शुरू नहीं आजीविका कॉम्प्लेक्स में कुल 29 दुकानें तैयार की गई हैं। इनमें पहले चरण में 8 दुकानों की नीलामी हो चुकी है। नीलामी के बाद भी अधिकांश दुकानों का हैंडओवर नहीं हुआ है। लिहाजा कॉम्प्लेक्स में अभी व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी हैं। कई दुकानों के शटर बंद हैं और वे कारोबार शुरू होने का इंतजार कर रही हैं।
13 दुकानों की नीलामी अभी बाकी
कॉम्प्लेक्स की शेष दुकानों को नीलाम करने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है। पहले चरण की 8 दुकानों के बाद 13 दुकानों की नीलामी अभी बाकी बताई जा रही है। यानी कॉम्प्लेक्स का बड़ा हिस्सा अभी खाली है। इसके बावजूद रात में पूरे परिसर को रोशन रखने से बिजली की खपत हो रही है।
सुरक्षा के लिए रोशनी जरूरी तो पूरे परिसर में हेलोजन क्यों?
रात में परिसर में रोशनी रखना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पूरे कॉम्प्लेक्स की सभी लाइटें रातभर चालू रखना जरूरी है? लोगों का कहना है कि जहां अधिकांश दुकानें बंद हैं, वहां जरूरत के मुताबिक सीमित रोशनी या कम बिजली खपत वाली व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सरकारी बिजली और संसाधनों की बचत भी होगी।
बिल किस मद से, जवाब भी जरूरी
रातभर जलने वाली हेलोजन लाइटों से होने वाली बिजली खपत का बिल आखिर किस मद से चुकाया जा रहा है, यह भी स्पष्ट नहीं है। जब कॉम्प्लेक्स की अधिकांश दुकानें अभी खाली हैं और कई दुकानों का हैंडओवर तक नहीं हुआ है, तब बिजली खर्च की निगरानी और उपयोग को लेकर जवाबदेही तय होना जरूरी है। सरकारी भवनों में बिजली की बचत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होना चाहिए।
इनका कहना…
आजीविका कांप्लेक्स को लेकर संबंधितों से चर्चा की जाएगी। दुकान नीलाम नहीं होने के बावजूद हैलोजन जलने के मामले को भी दिखवाएंगे।
– गणेश जायसवाल, सीईओ जिपं बैतूल
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