Sanjhveer Exclusive : बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने पर बदलेगा अंचल का कनेक्टिविटी नक्शा
इंदौर-नागपुर की दूरी घटेगी, गुजरात-महाराष्ट्र से सीधे जुड़ेगा बैतूल, 4415 करोड़ की परियोजना से मालवा-निमाड़ और सतपुड़ा अंचल को बड़ा फायदा

Sanjhveer Exclusive : बैतूल। बैतूल-खंडवा के बीच प्रस्तावित फोरलेन सडक़ परियोजना केवल दो शहरों को जोडऩे वाली सडक़ नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात से जोडऩे वाले बड़े कॉरिडोर के रूप में सामने आ रही है। करीब 233.65 किमी लंबे और 4415.60 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बैतूल की भूमिका इस पूरे क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट और कनेक्टिविटी हब के रूप में और मजबूत होगी। परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और वर्तमान में डीपीआर तथा जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाएं चल रही हैं।
बैतूल बनेगा मालवा-निमाड़ और विदर्भ के बीच अहम कड़ी
फोरलेन बनने का सबसे बड़ा फायदा बैतूल को इसलिए होगा, क्योंकि यह जिला पहले से ही महाराष्ट्र के नागपुर और मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है।
खंडवा की ओर फोरलेन कनेक्टिविटी मिलने के बाद बैतूल से आने-जाने वाला यातायात सीधे खंडवा, खरगोन, बड़वानी और बुरहानपुर की तरफ तेजी से पहुंच सकेगा। वहीं दूसरी ओर बैतूल के रास्ते नागपुर और विदर्भ क्षेत्र से आने वाला ट्रैफिक मालवा-निमाड़ की ओर आसानी से बढ़ सकेगा। इससे बैतूल की भौगोलिक स्थिति का व्यावसायिक महत्व भी बढऩे की संभावना है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, कृषि उपज की आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियों के लिए बेहतर सडक़ संपर्क नई संभावनाएं खोल सकता है।
इंदौर से नागपुर का सफर होगा आसान
परियोजना का असर इंदौर-नागपुर रूट पर भी दिखाई देगा। वर्तमान में कई हिस्सों में दो लेन सडक़ और यातायात के दबाव के कारण इंदौर से नागपुर पहुंचने में लंबा समय लगता है। प्रस्तावित सडक़ नेटवर्क के उन्नयन के बाद इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर की कनेक्टिविटी अधिक सुगम होगी। परियोजना से जुड़े दावों के मुताबिक भविष्य में दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 6 घंटे तक लाने का लक्ष्य है। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए इंदौर, बैतूल और महाराष्ट्र के बीच तेज आवागमन की सुविधा देगा।

अहमदाबाद-वडोदरा तक आसान होगी पहुंच
बैतूल-खंडवा कॉरिडोर का महत्व सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। खंडवा से आगे मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र को गुजरात की ओर बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से अहमदाबाद और वडोदरा जैसे बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी। इससे बैतूल सहित मध्य प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों से गुजरात तक माल परिवहन का रास्ता भी बेहतर होगा।
एक नजर में कॉरिडोर का असर
- बैतूल-खंडवा: 233.653 किमी का प्रस्तावित फोरलेन
परियोजना लागत: 4415.60 करोड़ रुपए - बैतूल: नागपुर और मालवा-निमाड़ के बीच अहम कड़ी
- महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ की ओर कनेक्टिविटी
- गुजरात: अहमदाबाद और वडोदरा तक बेहतर संपर्क
मध्य प्रदेश: इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी और बैतूल को फायदा
सिंहस्थ-2028 के लिए भी महत्वपूर्ण
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को देखते हुए भी इस सडक़ परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों के लिए मालवा-निमाड़ होते हुए उज्जैन तक पहुंच का एक वैकल्पिक और बेहतर मार्ग विकसित होगा। खंडवा के ओंकारेश्वर और उज्जैन के महाकालेश्वर के बीच धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ सकता है।
2027 से काम शुरू होने की संभावना
परियोजना के लिए एनएचएआई की ओर से डीपीआर तैयार की जा रही है। मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जनवरी 2027 से निर्माण शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित फोरलेन को भविष्य में छह लेन तक विस्तार देने की योजना भी बताई गई है। ब्लैक स्पॉट खत्म करने और सडक़ सुरक्षा के उपाय किए जाने से इस मार्ग पर आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है। निर्माण पूरा होने का लक्ष्य 2029 के अंत या 2030 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।
बैतूल के लिए यह परियोजना इसलिए खास है कि यह जिले को केवल एक मार्ग से दूसरे मार्ग से नहीं जोड़ेगी, बल्कि नागपुर-विदर्भ से लेकर खंडवा-निमाड़ और आगे गुजरात तक बनने वाले बड़े आर्थिक गलियारे के बीच बैतूल की स्थिति को और महत्वपूर्ण बना सकती है।




