Betul Samachar: जलाशय सूखे तो रबी पर संकट, तालाबों ने बचाई उम्मीद

जल भराव 40 प्रतिशत पर अटका, सितंबर के आखरी सप्ताह के आंकड़ों से तय होगी नहरों से सिंचाई की उम्मीद
Betul Samachar: बैतूल। मानसून सीजन में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से बैतूल जिले के जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया है। जिले के प्रमुख जलाशयों में फिलहाल औसतन करीब 40 से 45 प्रतिशत तक ही जलभराव हुआ है।
इससे किसानों के सामने आगामी रबी सीजन में सिंचाई को लेकर चिंता खड़ी होने लगी है। हालांकि राहत की बात यह है कि जिले के अधिकांश तालाबों में जलभराव की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। अब जल संसाधन विभाग की नजर आगामी बारिश और जलस्तर के आंकड़ों पर टिकी है।
जल संसाधन विभाग द्वारा 15 जून से जिले के जलस्त्रोतों की साप्ताहिक स्थिति तैयार की जा रही है। यह प्रक्रिया 30 अक्टूबर तक जारी रहेगी। बैतूल और मुलताई डिवीजन को मिलाकर जिले में करीब 127 छोटे-बड़े जलाशय हैं। इनमें लगभग 75 जलाशय बैतूल और करीब 50 मुलताई डिवीजन में आते हैं।
जल संसाधन विभाग के ईई रोशन सिंह के मुताबिक सापना और घोघरी जलाशयों में फिलहाल करीब 40 से 45 प्रतिशत जलभराव हुआ है। अन्य जलाशयों में इससे भी कम पानी है। हालांकि मानसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आगामी दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है। अच्छी बारिश होने पर जलाशयों के जलस्तर में तेजी से सुधार हो सकता है।
तालाबों ने फिलहाल दी राहत
जलाशयों की अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति के बीच जिले के करीब 200 तालाबों ने राहत दी है। विभाग के अनुसार अधिकांश तालाबों में पर्याप्त जलभराव हो चुका है। यही वजह है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह चिंताजनक नहीं मानी जा रही है। हालांकि जलस्त्रोतों में पिछले वर्षों की तुलना में पानी का स्तर कम बताया जा रहा है।
25 से 30 सितंबर तय करेगा सिंचाई का भविष्य
मिली जानकारी के मुताबिक किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की वास्तविक स्थिति 25 से 30 सितंबर के बीच स्पष्ट होगी। विभाग इसी अवधि में जलाशयों में उपलब्ध पानी का अंतिम आकलन करेगा।
इसके बाद रबी सीजन में नहरों से सिंचाई की योजना बनाई जाएगी। नियम के अनुसार किसानों को तीन बार पानी देने की व्यवस्था है, जिसमें 40, 30 और 30 प्रतिशत के अनुपात में पानी दिया जाता है। जलभराव के अंतिम आंकड़े तय करेंगे कि किसानों को कितनी सिंचाई उपलब्ध कराई जा सकेगी।
फिलहाल जिले के किसानों और जल संसाधन विभाग की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। आगामी एक से डेढ़ माह में अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों की स्थिति सुधर सकती है और सिंचाई का संकट भी टल सकता है। वहीं बारिश कमजोर रही तो जलाशयों में उपलब्ध पानी को लेकर प्रशासन को सिंचाई व्यवस्था की प्राथमिकताएं नए सिरे से तय करनी पड़ सकती हैं।
इनका कहना….
तालाबों में पर्याप्त जल भराव हो चुका है। जलाशयों में 40 से 45 प्रतिशत भराव ही हो पाया है, 25 से 30 सितंबर की स्तिथि अनुसार नहरों से सिंचाई की योजना तय की जाएगी।
रोशन सिंह, ईई, जल संसाधन विभाग बैतूल




