Betul Tapti Range: ताप्ती रेंज में कोटमी के बाद गौनीघाट में भी सागौन पर चली कुल्हाड़ी

चार दिन में दो जगह दर्जनों पेड़ों की कटाई, वन अमले की मौजूदगी के बावजूद माफियाओं के हौसले बुलंद; ठूंठ पर मिट्टी डालने के आरोप से उठे सवाल

Betul Tapti Range: बैतूल। दक्षिण वन मंडल की ताप्ती रेंज में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। चार दिन के अंतराल में कोटमी बीट के डोक्या जंगल और फिर गौनीघाट-कोल्हूढाना क्षेत्र में दर्जनों सागौन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाए जाने की बात सामने आई है।

खास बात यह है कि ताप्ती रेंज को संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और यहां रेंजर के नेतृत्व में वन अमला तैनात है। इसके बावजूद लगातार दो स्थानों पर कटाई सामने आने से वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर दूर काटे पेड़

बताया गया है कि चार दिन पहले कोटमी बीट के डोक्या जंगल में मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर अंदर एक दर्जन से अधिक सागौन के पेड़ काटे गए। कटाई के बाद लकड़ी को मौके से हटाने और ट्रैक्टरों के जरिए परिवहन किए जाने की भी चर्चा है। मुख्य मार्ग के इतने नजदीक बड़े पैमाने पर कटाई होने के बावजूद वन अमले को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई, यह सवाल अब उठ रहा है।

गौनीघाट में फिर काटे पेड़

कोटमी की घटना चर्चा में ही थी कि दो दिन पहले ताप्ती रेंज के गौनीघाट और कोल्हूढाना के बीच फिर सागौन के पेड़ों की कटाई सामने आई। यहां भी करीब एक दर्जन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की बात कही जा रही है। चार दिन के भीतर दो अलग-अलग स्थानों पर पेड़ों की कटाई सामने आने से वन विभाग की गश्ती और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मौके पर पहुंचे वन अमले ने कटे पेड़ों के ठूंठ पर मिट्टी डालकर उन्हें छिपाने का प्रयास किया। यदि ऐसा हुआ है तो यह कार्रवाई खुद कई सवाल खड़े करती है। कटाई के बाद ठूंठ की पहचान और पेड़ों की संख्या से जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें ढकने की जरूरत क्यों पड़ी, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

मामले में ताप्ती रेंज के रेंजर देवानंद डेहरया का कहना है कि कटाई हुई है, लेकिन कुछ ही पेड़ काटे गए हैं। हालांकि कटे पेड़ों की वास्तविक संख्या, लकड़ी की बरामदगी और आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कवरेज क्षेत्र से बाहर होने के कारण चर्चा नहीं हो सकी।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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