Betul Samachar: एसडीओ के निलंबन का नाम आते ही मुस्कुराए कलेक्टर, लिंक रोड पर खुली ‘खामियोंÓ की परत

10 मीटर की सड़क, मौके पर कहीं कम-कहीं ज्यादा निर्माण; अतिक्रमण, बिजली पोल, तार और पेड़ों के बीच फंस गया काम—कलेक्टर ने 5 बिंदुओं पर जांच बैठाई
Betul Samachar: बैतूल। टिकारी से कारगिल चौक तक बन रही लिंक रोड अब निर्माण से ज्यादा सवालों को लेकर चर्चा में है। बुधवार को जनसुनवाई में महावीर वार्ड की पार्षद वर्षा बारस्कर ने पीडब्ल्यूडी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए शिकायतों की लंबी फेहरिस्त कलेक्टर के सामने रख दी। शिकायत सुनते-सुनते मामला उस अफसर तक पहुंचा, जिसके चार्ज में यह काम था।
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने मौके पर मौजूद पीडब्ल्यूडी की महिला सब इंजीनियर से पूछा कि सड़क निर्माण किसके चार्ज में था। जवाब मिला—एसडीओ अखिल कवड़े। इसके बाद जब सब इंजीनियर ने बताया कि कवड़े को निलंबित किया जा चुका है, तो कलेक्टर मुस्कुरा दिए। इस एक प्रतिक्रिया ने जनसुनवाई में मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया।
मामला यहीं नहीं रुका। कलेक्टर ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री को शिकायत में उठाए गए सभी पांच बिंदुओं की बिंदुवार जांच के निर्देश दे दिए। अब जांच में यह सामने आएगा कि सड़क निर्माण में वास्तव में नियमों की अनदेखी हुई है या फिर मौके की परिस्थितियों के कारण निर्माण का स्वरूप बदला गया।
स्वीकृति 10 मीटर की, सड़क मौके की ‘जगहÓ देखकर?
पार्षद का आरोप है कि सड़क की स्वीकृत चौड़ाई 10 मीटर है, लेकिन अतिक्रमण हटाए बिना निर्माण शुरू कर दिया गया। जहां जितनी जगह मिल रही है, उसी हिसाब से सड़क बनाई जा रही है। सवाल यह है कि पहले रास्ता साफ होना था या पहले सड़क?
पोल-तार वहीं, सड़क बनाने की जल्दी क्यों? सड़क के रास्ते में बिजली के पोल और तारों की फेसिंग भी बनी हुई है। ऐसे में स्वीकृत चौड़ाई के मुताबिक सड़क कैसे बनेगी, यह बड़ा सवाल है। शिकायत में संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी की ओर भी इशारा किया गया है। रास्ते में आने वाले करीब पांच पेड़ों को हटाए बिना ही निर्माण शुरू करने का आरोप है। अब सवाल यह है कि सड़क का नक्शा पहले बना था या मौके पर बाधाओं के हिसाब से सड़क का आकार तय हो रहा है?
नाली के बिना सड़क, कल फिर खोदना पड़े तो जिम्मेदार कौन?
राठी हॉस्पिटल के सामने नाली का निर्माण किए बिना सड़क बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। यदि बाद में नाली के लिए बनी-बनाई सड़क खोदनी पड़ी तो सरकारी धन और समय दोनों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन होगा?
अब जांच बताएगी—गलती किसकी और ‘खेलÓ कितना बड़ा?
कलेक्टर के निर्देश के बाद पीडब्ल्यूडी पांचों बिंदुओं की जांच करेगा। अतिक्रमण से लेकर बिजली पोल, पेड़ों और नाली तक हर बिंदु की स्थिति देखी जाएगी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि लिंक रोड के निर्माण में तकनीकी मजबूरी थी या योजना और क्रियान्वयन के बीच कहीं बड़ा अंतर रह गया। फिलहाल जनसुनवाई में कलेक्टर की मुस्कान और उसके बाद दिए गए जांच के निर्देश ने लिंक रोड के मामले को जरूर गरमा दिया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं कि सड़क बनेगी नियम से या जांच में निकलेगा निर्माण का असली ‘रोडमैपÓ?
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