Betul Samachar: रजिस्ट्री कार्यालय में अलग नियम: मुलताई-आमला-भैंसदेही शाहपुर से अतिरिक्त वसूली!

सांझवीर टाईम्स की खबरों के बाद परत-दर-परत सामने आ रही शिकायतें,
Betul Samachar: बैतूल। रजिस्ट्री कार्यालय बैतूल में कथित अतिरिक्त वसूली को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद अब शिकायतों की एक और परत सामने आई है। जिले के मुलताई, आमला, भैंसदेही और शाहपुर क्षेत्र से जमीन-मकान की रजिस्ट्री कराने बैतूल आने वाले लोगों से निर्धारित शुल्क के अलावा अलग से 5 हजार रुपए लिए जाने का आरोप सामने आया है। इन क्षेत्रों से रजिस्ट्री कराने पहुंचे कई लोगों का कहना है कि उनसे दस्तावेज पंजीयन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त 5 हजार रुपए की राशि ली गई।
मामला सामने आने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरा गए हैं। खास बात यह है कि एक ओर कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी कथित अतिरिक्त वसूली के आरोपों को साबित करने की चुनौती देते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की ओर से अलग से राशि लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
खबरों के बाद अब अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आ रही शिकायतें
सांझवीर टाईम्स द्वारा रजिस्ट्री कार्यालय की कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। खबरों के बाद जहां सर्विस प्रोवाइडरों की ओर से सफाई देने के लिए फोन आने की बात सामने आई है, वहीं अब रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। मुलताई, आमला, भैंसदेही और शाहपुर क्षेत्र से रजिस्ट्री कराने आए लोगों ने दावा किया कि उनसे सरकारी शुल्क के अलावा 5 हजार रुपए अतिरिक्त लिए गए। लोगों के मुताबिक यह राशि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर ली गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
साबित कैसे करोग से नहीं मिटेंगे सवाल
रजिस्ट्री कार्यालय में कथित अतिरिक्त वसूली को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले लोगों द्वारा एक जैसी शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं? केवल यह कहना कि अतिरिक्त राशि लेने की बात साबित नहीं की जा सकती, आरोपों का समाधान नहीं है। यदि शिकायतें गलत हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं यदि कहीं निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त राशि ली जा रही है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी है। ऐसे में जांच ही इस पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
आकस्मिक निरीक्षण से सामने आ सकती है वास्तविकता
रजिस्ट्री कार्यालय में सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है या नहीं, यह जानने के लिए जिले के कलेक्टर द्वारा अचानक निरीक्षण किया जाए तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। बिना पूर्व सूचना निरीक्षण होने पर कार्यालय में आने वाले पक्षकारों, सर्विस प्रोवाइडरों और रजिस्ट्री प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को देखा जा सकता है। इसके साथ ही मुलताई, आमला, भैंसदेही और शाहपुर से रजिस्ट्री कराने आए लोगों से सीधे जानकारी ली जाए कि उनसे निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई राशि ली गई या नहीं। यदि अलग-अलग लोगों की शिकायतों में एक जैसी बात सामने आती है तो मामले की गंभीरता और बढ़ जाएगी।
विभागीय अधिकारियों की ईमानदारी की परीक्षा भी जरूरी
रजिस्ट्री कार्यालय की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारी यदि स्वयं को पूरी तरह ईमानदार और पारदर्शी बता रहे हैं तो फिर जांच से पीछे हटने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। ‘साबित कैसे करोगेÓ के बजाय यह पता लगाना जरूरी है कि शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं और रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क के अलावा राशि देने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के बीच अब मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच और कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रजिस्ट्री कार्यालय में वास्तव में सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है या फिर कागजों पर पारदर्शिता और जमीन पर व्यवस्था में अंतर है।




