Betul News: फीता कटा, फोटो खींची… फिर ताले में कैद हो गया 84.98 लाख का विश्रामालय

लाखों की इमारत पर ताला, मरीजों के परिजन अब भी फर्श पर रात गुजारने को मजबूर

Betul News: बैतूल। जिला अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले गरीब और दूरदराज से पहुंचने वाले परिजनों को राहत देने के उद्देश्य से करीब 84.98 लाख की लागत से बनाया 30 बिस्तरों वाला विश्रामालय उद्घाटन के तीन महीने बाद भी लोगों के किसी काम नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि जिस भवन का फीता बड़े नेताओं की मौजूदगी में काटकर वाहवाही लूटी गई थी, उसी भवन के मुख्य दरवाजे पर आज भी ताला लटका हुआ है। सवाल यह है कि जब संचालन की कोई व्यवस्था ही तय नहीं थी तो आखिर इतनी जल्दबाजी में उद्घाटन करने की जरूरत क्या थी?

मई माह में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सहित जिले के सभी विधायकों की मौजूदगी में विश्रामालय का शुभारंभ किया था। उस समय इसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी सौगात बताया गया, लेकिन उद्घाटन के बाद यह सौगात केवल फोटो और भाषणों तक ही सीमित रह गई। तीन महीने बीत जाने के बावजूद विश्रामालय का उपयोग शुरू नहीं हो सका।

संचालक को लेकर कोई व्यवस्था नहीं

सबसे हैरानी की बात यह है कि अब तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि विश्रामालय का संचालन कौन करेगा, इसकी जिम्मेदारी किस संस्था को दी जाएगी और यहां ठहरने वाले लोगों से कितना शुल्क लिया जाएगा। यानी करोड़ों के सरकारी संसाधन के उपयोग की बुनियादी व्यवस्था तक अधिकारियों ने पहले से तैयार नहीं की। नतीजा यह है कि भवन धूल फांक रहा है और जरूरतमंद लोग अस्पताल परिसर में खुले आसमान, बरामदों और फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं। यह पूरा मामला सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पहले उद्घाटन कर दिया गया और बाद में संचालन की व्यवस्था तलाशने की कोशिश शुरू हुई। क्या जनता की सुविधा से ज्यादा जरूरी केवल फीता काटकर उपलब्धि गिनाना था? यदि व्यवस्थाएं पूरी नहीं थीं तो उद्घाटन क्यों किया गया?

ठहरने के लिए परेशान होते मरीज के परिजन

जिस विश्रामालय से मरीजों के परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वह आज सरकारी लापरवाही का प्रतीक बनकर खड़ा है। लाखों की लागत से तैयार भवन बंद पड़ा है, जबकि हर दिन अस्पताल में आने वाले लोग ठहरने की परेशानी झेल रहे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द से जल्द संचालन की व्यवस्था तय करें, शुल्क की स्पष्ट नीति घोषित करें और विश्रामालय को आम लोगों के लिए शुरू करें। अन्यथा यह भवन भी सरकारी घोषणाओं और अधूरे वादों की एक और मिसाल बनकर रह जाएगा। इस संबंध में जानकारी के सिविल सर्जन डॉक्टर जगदीश घोरे से संपर्क किया, लेकिन उन से सम्पर्क नहीं हुआ।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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