Betul Registery Office: रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर ‘‘कमीशन कॉरिडोर’’! सर्विस प्रोवाइडरों का लाखों का कथित नेटवर्क

कार्यालय में सिर्फ रजिस्ट्री पर दस्तखत, बाहर तय हो रही पूरी ‘‘डील’’

Betul Registery Office:  बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जिले के रजिस्ट्रार कार्यालय में भूमि की खरीद फरोख्त के लिए की जाने वाली रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा हैं कि कार्यालय के भीतर केवल औपचारिक रजिस्ट्री की ही कार्रवाई होती है, जबकि कथित कमीशन और लेन-देन का पूरा असली खेल बाहर बैठे सर्विस प्रोवाइडरों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन होने वाली दर्जनों रजिस्ट्रियों के साथ लाखों रुपये का अतिरिक्त नकद लेन-देन कार्यालय के बाहर ही निपटा दिया जाता है, जिससे अब पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि चोरी चोरी, चुपके खेले जा रहे भृस्टाचार का खेल भी बाहर आ रहा है। नानू का खेल सामने आने के बाद यह तय किया गया है कि जनहित में सांझवीर टाइम्स परत दर परत पूरे खेल का पर्दाफाश करेगा।

दस्तावेज तैयार करने की आड़ में अतिरिक्त वसूली के आरोप

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा अधिकृत सर्विस प्रोवाइडरों का काम रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज तैयार कर उन्हें कार्यालय में प्रस्तुत करना है। लेकिन सूत्रों का आरोप है कि यही सर्विस प्रोवाइडर दस्तावेज तैयार करने और निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी के अलावा पक्षकारों से अतिरिक्त नकद राशि भी वसूल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह राशि कथित रूप से कमीशन के रूप में ली जाती है, जिसकी कोई आधिकारिक रसीद या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। मजे की बात यह भी है कि सर्विस प्रोवाइडर भूमि की खरीद फरोख्त करने वाले क्रेता और विक्रेताओं को असली वजह बताकर यह राशि वसूल रहे हैं।

‘‘बाहर की बाहर’’ निपट रहा कथित हिसाब, किताब

सूत्रों के मुताबिक, अतिरिक्त वसूली गई रकम संबंधित लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी कथित रूप से सर्विस प्रोवाइडरों के पास ही है। इसी वजह से कार्यालय के भीतर किसी प्रकार के वित्तीय लेन-देन का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आता और पूरा कथित खेल कार्यालय परिसर के बाहर ही संचालित होने की बात कही जा रही है। इससे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और भी जटिल हो जाती है।

अधिकारियों के बेदाग होने का दावा, जांच की उठी मांग

दूसरी ओर, विभागीय अधिकारी स्वयं को पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप कार्य करने वाला बता रहे हैं। हालांकि भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े कई लोगों का दावा है कि बिना अतिरिक्त भुगतान के रजिस्ट्री प्रक्रिया आसान नहीं होती। इन आरोपों के बीच अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सर्विस प्रोवाइडरों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग तेज हो रही है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासन को राजस्व हानि पहुंचाने और व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में उपपंजीयक दिनेश कौसले से उनके मोबाईल पर चर्चा करने का प्रयास किया, लेकिन बैठक में होने के कारण बात नहीं हो सकी।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button