Betul News: शवों की आड़ में शर्मनाक सौदा! नए शव वाहन वापस लेकर थमा दिए कबाड़, रस्सी से बंद हो रहे दरवाजे

करोड़ों का भुगतान, अंतिम यात्रा के लिए जर्जर वाहन, एक वर्कशॉप में, दूसरा भी जवाब देने की कगार पर

Betul News: बैतूल। सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नि:शुल्क शव परिवहन की सुविधा देने के लिए संजीवनी 108 सेवा पर हर माह करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन बैतूल जिले में इस सेवा की हकीकत बेहद शर्मनाक तस्वीर पेश कर रही है। यहां मृतकों के शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से पहुंचाने के बजाय कबाड़ हो चुके वाहनों में ढोया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि एक वाहन वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ा है, जबकि दूसरे के दरवाजे तक रस्सी के सहारे बंद किए जा रहे हैं। शवों के परिवहन को लेकर सबसे ज्यादा शर्मनाक स्थिति यह सामने आई है कि कुछ महीने पहले कम्पनी ने दो नए वाहन यहां भेजे थे, जिन्हें वापस भोपाल बुलाकर कंडम वाहन थमा दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार कुछ माह पहले जिले को दो नए शव वाहन उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन अचानक कंपनी के निर्देश पर दोनों वाहनों को वापस भोपाल बुला लिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नए वाहन क्यों वापस लिए गए? उनकी जगह ऐसे पुराने और कंडम वाहन भेज दिए गए, जो पहले से ही खराब हालत में थे। इस पूरे घटनाक्रम पर न तो कंपनी ने कोई स्पष्ट जवाब दिया और न ही स्वास्थ्य विभाग ने कोई जानकारी सार्वजनिक की। वर्तमान में उपलब्ध एकमात्र शव वाहन की स्थिति बेहद दयनीय बताई जा रही है। वाहन के दरवाजे ठीक से बंद नहीं होते, जिन्हें रस्सी से बांधकर चलाया जा रहा है। दूसरा वाहन पहले ही वर्कशॉप में खड़ा है। ऐसे में किसी भी समय शव परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप होने का खतरा बना हुआ है।

करोड़ों का भुगतान, जवाबदेही शून्य

सरकार इस सेवा के संचालन के लिए कंपनी को हर माह करोड़ों का भुगतान कर रही है, ताकि उपचार के दौरान मृत्यु होने पर गरीब परिवारों को नि:शुल्क शव परिवहन मिल सके। इसके बावजूद कंपनी द्वारा जर्जर वाहनों से सेवा देना गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाता है। हैरानी की बात यह है कि इस स्थिति के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कंपनी पर कार्रवाई करने या भुगतान रोकने जैसे कदम उठाते नजर नहीं आ रहे।

बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

जब जिले में शव परिवहन जैसी संवेदनशील सेवा कबाड़ वाहनों के भरोसे चल रही है, तो आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है? नए वाहन वापस लेने के पीछे क्या कारण था और जर्जर वाहनों के बावजूद कंपनी को करोड़ों का भुगतान क्यों जारी है? अब जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील सेवा के साथ हो रहा यह खिलवाड़ बंद हो सके।

इनका कहना….

शवों को उनके गांव और घरों तक भेजने की जिम्मेदारी संजीवनी 108 की है, इस सम्बंध में कम्पनी के अधिकारी ही ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।

डॉ जगदीश घोरे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल बैतूल

कम्पनी की तरफ से दो वाहन प्राप्त हुए थे, लेकिन कम्पनी के निर्देश मिलने के बाद उन्हें वापस भोपाल भेज दिया गया है। एक वाहन की रिपेयरिंग करवाई जा रही है। इसके बाद दूसरा वाहन रिपेयर कराया जाएगा।

शुभम धोटे, प्रभारी संजीवनी 108 बैतूल

 

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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