Betul Ki Khabar: अल्प वर्षा ने बढ़ाई चिंता, बैतूल डिवीजन के 104 डैम प्यासे

जिले में महज 338.1 मिमी बारिश, खरीफ के साथ रबी फसल पर भी संकट के बादल
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून की दस्तक को एक माह पूरा होने के बावजूद जिले में अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी है। बैतूल डिवीजन के सभी 104 जलाशयों का जलस्तर न्यूनतम स्तर से नीचे बना हुआ है। ऐसे हालात में खरीफ फसल के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी आशंकाएं गहराने लगी हैं।
जिले में अब तक केवल 338.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य वर्षा की तुलना में कम मानी जा रही है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैतूल डिवीजन के अंतर्गत आने वाले सभी 104 जलाशय अभी भी पर्याप्त पानी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अधिकांश जलाशयों का जलस्तर न्यूनतम सीमा से नीचे है, जिससे भविष्य में जल संकट की संभावना बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में मानसून के सक्रिय होने के संकेत मिले थे और अच्छी बारिश की उम्मीद जगी थी, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में केवल रिमझिम वर्षा ही दर्ज की गई। शुक्रवार को बारिश का दौर भी थम गया और तेज धूप निकलने से लोगों की चिंता और बढ़ गई।
नदियां, नाले और कुएं भी सूने
अल्प वर्षा का असर केवल बांधों और जलाशयों तक सीमित नहीं है। जिले की नदियां, नाले, तालाब, पोखर, कुएं और ट्यूबवेल भी पर्याप्त रूप से नहीं भर पाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से पेयजल संकट की आशंका भी बढ़ रही है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सर्दियों और गर्मी के मौसम में जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है। वर्षा ऋतु के चार महीने—जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर—माने जाते हैं।
इनमें से लगभग आधा समय बीत चुका है। सामान्य स्थिति में जुलाई के अंत तक औसत वर्षा का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाता है, लेकिन इस वर्ष बारिश का आंकड़ा अपेक्षा से काफी कम है। अब केवल अगस्त और सितंबर के दो महीने शेष हैं, जिन पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं जलाशयों में पर्याप्त जलभराव नहीं होने की स्थिति में रबी सीजन की सिंचाई व्यवस्था भी संकट में पड़ सकती है। किसानों का कहना है कि समय पर और पर्याप्त बारिश ही खेती और जल संसाधनों को राहत दे सकती है। फिलहाल जिलेवासियों की उम्मीदें मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
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