Betul Coaching Centre: 500 वर्गमीटर की शर्त ने रोकी कार्रवाई, फायर सिस्टम बिना चल रहे संस्थान

जिले के अधिकांश कोचिंग सेंटर नियमों के दायरे से बाहर, कार्रवाई के सामने कानूनी पेच
Betul Coaching Centre: बैतूल। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग जैसी घटना ने देशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैतूल जिले में भी गली-मोहल्लों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश संस्थानों में आग से बचाव के लिए आवश्यक फायर सेफ्टी सिस्टम तक उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन चाहकर भी इन पर सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, क्योंकि नियमों का सबसे बड़ा पेच 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल की सीमा बन गया है।
दरअसल, वर्तमान नियमों के अनुसार 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों में ही फायर सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य है। इससे कम क्षेत्रफल वाले भवनों में संचालित संस्थानों पर यह प्रावधान लागू नहीं होता। जिले के अधिकांश कोचिंग सेंटर 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्र वाले भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के पास उन्हें फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने के लिए बाध्य करने का कानूनी आधार नहीं है।
अधिकारियों के नियमों के कारण बंधे हाथ
लखनऊ हादसे के बाद नगर पालिका और प्रशासन ने शहर के कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि अधिकांश संस्थान छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई जगह न तो अग्निशमन यंत्र मिले और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था दिखाई दी। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों के हाथ नियमों के कारण बंधे नजर आए।
अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान जिन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी कमियां मिलीं, उनमें से सात कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी कर आवश्यक फायर सेफ्टी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, यह निर्देश सलाह और सुरक्षा के दृष्टिकोण से दिए गए हैं, क्योंकि वर्तमान नियमों के तहत उन्हें बाध्य करना आसान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग जैसी दुर्घटनाएं भवन के आकार को देखकर नहीं होतीं।
यदि किसी छोटे भवन में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, तो वहां भी फायर सेफ्टी की अनिवार्य व्यवस्था होना आवश्यक है। ऐसे में केवल 500 वर्गमीटर की सीमा के आधार पर सुरक्षा मानकों को सीमित करना भविष्य में गंभीर हादसों को न्योता देने जैसा हो सकता है। अब सवाल यह है कि जब छोटे भवनों में सैकड़ों विद्यार्थी एक साथ अध्ययन कर रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
नियमों की इस खामी को दूर किए बिना किसी बड़ी दुर्घटना के बाद केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत है कि फायर सेफ्टी के नियमों की समीक्षा कर सभी कोचिंग संस्थानों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक अनिवार्य किए जाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित हो सके।
इनका कहना…
कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देखा। 7 संस्थाओं को नोटिस जारी किए है। 500 वर्गमीटर एरिया में बने भवन में ही फायर सिस्टम लगाने के नियम है। इससे कम एरिया में बने भवन में फायर सिस्टम लगाने बाध्य नहीं कर सकते। नियमों के पेच के कारण कई संस्थान पर कार्रवाई नहीं कर सकते।
नगेन्द्र वागद्रे
सब इंजीनियर, नपा बैतूल
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