Betul News: 21 परिवारों को पट्टा देने की मांग पर विवाद, तहसीलदार पर धमकाने का आरोप

राज्यपाल के मौखिक निर्देशों की भी अनदेखी का दावा, आशियाने की मांग को लेकर पहुंचे आदिवासी
Betul News: बैतूल। झल्लार क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवारों को आवासीय पट्टा देने की मांग को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्राम गायखाम पंचायत कालडोंगरी के 21 आदिवासी परिवारों ने तहसीलदार पर अभद्र व्यवहार करने, पुलिस बुलाने की धमकी देने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनने का आरोप लगाया है। मामले ने अब प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
आदिवासी परिवारों का कहना है कि गांव के समीप गायखाम-धामगांव मार्ग पर लगभग 9 एकड़ सरकारी आबादी भूमि उपलब्ध है। इस भूमि पर केवल एक पानी की टंकी निर्मित है, जबकि शेष जमीन खाली पड़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से गांव में निवास कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते परिवार और पैतृक संपत्ति के बंटवारे के कारण उनके पास नए मकान निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन नहीं बची है। इसी वजह से वे सरकारी भूमि पर आवासीय पट्टे की मांग कर रहे हैं।
तहसीलदार पर लगाए गए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपनी मांग लेकर तहसीलदार राजेश दुबे के पास पहुंचे तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया। पीड़ितों का दावा है कि तहसीलदार ने पुलिस बुलाकर अंदर करवाने तक की धमकी दी। आदिवासियों का कहना है कि वे केवल पट्टा आवंटन की मांग कर रहे थे, इसके बावजूद उन्हें अपमानित किया। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते गंभीर आपत्ति जताई है। इस मामले को लेकर तहसीलदार राजेश दुबे से भी वस्तुस्थिति और उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नम्बर 7701072527 पर कई बार सम्पर्क किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
राज्यपाल से भी लगाई थी गुहार, दिए थे निर्देश
पीड़ित आदिवासियों के अनुसार वे पहले भी मुख्यमंत्री, कमिश्नर, कलेक्टर और एसडीएम स्तर तक आवेदन दे चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हुई। हाल ही में जिले के प्रवास पर आए राज्यपाल मंगूभाई पटेल को भी उन्होंने ज्ञापन सौंपा था। आदिवासियों का दावा है कि राज्यपाल ने मौके पर ही तहसीलदार को बुलाकर मामले के निराकरण के मौखिक निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उल्टा उन्हें अभद्र भाषा का उपयोग कर धमकाते हुए पुलिस का डर दिखाया गया। यह कृत्य कहीं से कहीं तक न्यायोचित नहीं है।
घटनाक्रम आदिवासी संगठनों तक पहुंचाने की तैयारी
मामले को लेकर आदिवासी परिवार अब उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी में हैं। साथ ही विभिन्न आदिवासी संगठनों के माध्यम से विरोध दर्ज कराने की भी रणनीति बनाई जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी पात्रता की जांच कर उन्हें आवासीय पट्टे उपलब्ध कराए जाएं जो उनका हक है और शासन के निर्देश भी ताकि वे अपने परिवार के लिए स्थायी आशियाना बना सकें।
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