Gram Support Price Registration: चना समर्थन मूल्य पंजीयन में बड़ा फर्जीवाड़ा! खसरे और पंजीयन में नाम अलग, लाखों के खेल की आशंका

भैंसदेही विकासखंड में फिर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

Gram Support Price Registration: जिले में चना समर्थन मूल्य खरीदी भले ही 28 मई को समाप्त हो चुकी हो, लेकिन खरीदी के लिए कराए गए किसान पंजीयनों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। भैंसदेही विकासखंड में पंजीयन प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर लाखों का खेल किए जाने की चर्चा है।

खास बात यह है कि इसी क्षेत्र में पूर्व में भी समर्थन मूल्य खरीदी में फर्जीवाड़े के मामले सामने आ चुके हैं और कई मामलों में जांच के बाद कार्रवाई भी हुई थी। इसके बावजूद एक बार फिर अनियमितताओं के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामला पूर्णा विपणन सहकारी समिति से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि किसान पंजीयन में दर्ज जानकारी और राजस्व अभिलेखों में उल्लेखित जानकारी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही है।

बताया जा रहा है कि पंजीयन सहदेव पिता नत्थू के नाम से किया गया, जबकि संबंधित खसरे में वल्दियत रामजी दर्ज है। सामान्यत: खसरे में दर्ज विवरण के अनुरूप ही पंजीयन होना चाहिए, लेकिन दोनों अभिलेखों में स्पष्ट अंतर दिखाई देने के बावजूद पंजीयन स्वीकृत कर दिया गया।

नाम जोड़कर फर्जीवाड़े का आरोप

सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले में साहेबराव नाम भी अलग से जोड़कर पंजीयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का रास्ता तैयार किया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि सरकारी खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

उल्लेखनीय है कि पूर्व में समर्थन मूल्य खरीदी में इसी प्रकार के फर्जी पंजीयन सामने आने पर तत्कालीन कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने तहसीलदारों के माध्यम से जांच कराई थी। जांच में कई पंजीयन संदिग्ध पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें निरस्त करने की कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद इस बार फिर ऐसे आरोप सामने आना चिंताजनक माना जा रहा है।

गिरदावरी रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

इधर संबंधित समिति के प्रबंधक का कहना है कि पंजीयन उपलब्ध दस्तावेजों और गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि खसरे और पंजीयन में अंतर है तो कहीं गड़बड़ी की शुरुआत गिरदावरी स्तर से तो नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जानकारों का मानना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, गिरदावरी रिपोर्ट और पंजीयन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती

इनका कहना….

गिरदावरी की रिपोर्ट और कृषि भूमि से सम्बंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किसानों के पंजीयन किये गए हैं। पंजीयन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। 

राजा जैन, प्रबन्धक पूर्णा विपणन सहकारी समिति, भंैसदेही

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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