Betul News: जनजातीय विभाग में 14 हजार की रोटी मेकर मशीन का 25 हजार भुगतान!

खरीदी की प्रक्रिया पर घिरे विभागीय अधिकारी, घटियां मशीन को लेकर भी उठ रहे गंभीर सवाल
Betul News: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जिले के जनजातीय कार्य विभाग में एक बार फिर खरीदी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों और कन्या आश्रमों के लिए हाल ही में खरीदी गई रोटी मेकर मशीनों की खरीदी अब चर्चाओं का विषय बन गई है।
सूत्रों के अनुसार इस खरीदी में बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर मशीनें खरीदकर शासन को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। मामले को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
14 हजार की मशीन का भुगतान 25 हजार तक
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के छात्रावासों और आश्रमों में उपयोग के लिए बड़ी संख्या में रोटी मेकर मशीनें खरीदी गई हैं। सूत्र बताते हैं कि बाजार में 14 से 15 हजार रुपए में उपलब्ध मशीनों का भुगतान विभाग द्वारा 22 से 25 हजार रुपए तक किया गया है। इस अंतर को लेकर अब विभागीय खरीदी प्रक्रिया पर संदेह गहराने लगा है।
चर्चा है कि खरीदी में मनमाने तरीके से दरें तय कर करोड़ों रुपए का खेल किया गया है। बताया जा रहा है कि जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित करीब 134 छात्रावासों और कन्या आश्रमों के लिए जिला स्तर पर रोटी मेकर मशीनों की खरीदी की गई।
आरोप यह भी लग रहे हैं कि जिन मशीनों की सप्लाई की गई है उनकी गुणवत्ता भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। कई स्थानों पर मशीनों को घटिया स्तर का बताया जा रहा है, जिससे भविष्य में खराबी और रखरखाव की समस्या बढऩे की आशंका जताई जा रही है।
स्टॉक पंजी में चढ़ाने का अधीक्षकों पर बनाया जा रहा दबाव
सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों द्वारा छात्रावास अधीक्षकों पर मशीनों को स्टॉक पंजी में दर्ज करने के लिए दबाव बनाए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बिना गुणवत्ता परीक्षण और उपयोगिता जांच के मशीनों को स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे विभाग के भीतर असंतोष की स्थिति भी बन रही है। जनजातीय कार्य विभाग पूर्व में भी खरीदी और नियुक्तियों को लेकर विवादों में रह चुका है। विभाग में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट खर्च होता है, ऐसे में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा मामले में भी लोगों का कहना है कि यदि खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
सहायक आयुक्त ने नम्बर ब्लॉक कर डाला गलतियों पर पर्दा
अब देखना यह होगा कि शासन और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या खरीदी प्रक्रिया की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
इस मामले को लेकर सहायक आयुक्त विवेक पांडेय का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नम्बर 9303272071 पर सम्पर्क किया गया लेकिन हर बार की तरह उनका नम्बर व्यस्त ही बता रहा था। जानकारी मिली है कि अपने कार्यों पर पर्दा डालने के उद्देश्य से उन्होंने अधिकांश पत्रकारों के मोबाइल नम्बर बिजी मोड में डालाकर रखे हैं ताकी कोई सवाल नहीं कर पाए।
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