Betul Ki Khabar: अतिक्रमण हटाने का आदेश देकर खुद भूली नपा

1 व्यक्ति को 1 दुकान लगाने का फरमान बेअसर, शासकीय कार्यालय और अधिकारियों के आवास तक फैला अतिक्रमण

Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर को नगर निगम बनाने की दिशा में प्रशासन भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। शहर में तेजी से फैल रहे अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए शुरू किया गया नगरपालिका का अभियान अब ठंडा पड़ चुका है।

हालत यह है कि जिस अभियान की शुरुआत सख्ती और बड़े दावों के साथ हुई थी, वह महज 15 दिन में ही दम तोड़ता नजर आ रहा है। अब फिर से फुटपाथों, सडक़ों, शासकीय कार्यालयों और अधिकारियों के आवासों तक अतिक्रमण फैल चुका है।

हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में शहर के विकास और बैतूल को नगर निगम बनाने की दिशा में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। बैठक में नए कलेक्टर और नगरपालिका अधिकारियों को शहर में बढ़ते अतिक्रमण पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद नगरपालिका के राजस्व अमले ने कुछ दिनों तक अभियान चलाकर फुटपाथों और मुख्य मार्गों से अस्थायी दुकानों को हटाया तथा सख्त हिदायत दी गई थी कि एक व्यक्ति केवल एक ही दुकान लगाएगा।

शुरुआती सख्ती के बाद ढीला पड़ा अभियान

नगरपालिका द्वारा शुरुआत में कार्रवाई तेज गति से की गई। कई जगहों से दुकानें हटाई गईं और अतिक्रमणकारियों को चेतावनी भी दी गई। प्रशासन ने यह भी कहा था कि दुकानदारों के लिए अलग-अलग स्थान चिन्हित किए जाएंगे ताकि यातायात और आमजन को परेशानी न हो। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जिन लोगों को हटाया गया था, वे दोबारा उसी स्थान पर दुकानें लगाने लगे हैं। कई लोग एक ही नाम से कई-कई दुकानें संचालित कर रहे हैं।

नगरपालिका कार्यालय से लेकर एसडीएम ऑफिस तक अतिक्रमण

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शहर में अतिक्रमण केवल बाजार क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। नगरपालिका कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय और अधिकारियों के सरकारी आवासों के सामने तक फुटपाथों और सडक़ों पर दुकानें सज चुकी हैं। सडक़ किनारे तक दुकानें फैल जाने के कारण वाहन सडक़ पर खड़े हो रहे हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बन रही है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यालयों के सामने ही यदि नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है तो आम शहर में व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अमला सब कुछ देखते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहा।

विधायक और कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी

शहरवासियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि विधायक और कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नगरपालिका का राजस्व अमला गंभीरता नहीं दिखा रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही दोबारा कब्जा करने वालों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। इससे यह साफ नजर आ रहा है कि प्रशासनिक आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

नगर निगम के सपने पर उठ रहे सवाल

बैतूल को नगर निगम बनाने की योजना को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था और बढ़ते अतिक्रमण ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक शहर को व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त नहीं बनाया जाएगा, तब तक नगर निगम का सपना अधूरा ही रहेगा।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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