Janani Suraksha Yojana: जननी सुरक्षा योजना की खुली पोल: जिले में 369 हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, जमीन पर नहीं हो रहा काम

Janani Suraksha Yojana: बैतूल : जिले में मातृ एवं शिशु सुरक्षा के लिए चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना की जमीनी हकीकत अब संदेह के घेरे में है। सरकारी दावों और हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हुई है। हाल ही में चलाए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

अभियान के तहत जिले में कुल 831 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिसमें चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से 369 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में पाई गईं। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वर्षों से चल रही योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है।

विभाग का यह दावा

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले के सीएचसी, पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श दिया जाता है। इसके अलावा पोषण, एनीमिया नियंत्रण और सुरक्षित प्रसव को लेकर भी कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की संख्या में लगातार इजाफा होना इन दावों की पोल खोल रहा है।

यह महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में

विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क प्रेगनेंसी के प्रमुख कारणों में खून की कमी (एनीमिया), हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कम वजन, कम उम्र में गर्भधारण और पूर्व से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। इन स्थितियों में गर्भवती महिला और शिशु दोनों की जान को खतरा रहता है। ऐसे मामलों में विशेष निगरानी और समय पर उपचार बेहद जरूरी होता है।

यह स्थिति कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है कि जब नियमित जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में क्यों पहुंच रही हैं? क्या स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच सिर्फ कागजों में हो रही है, या जमीनी स्तर पर निगरानी और फॉलोअप में कहीं कमी रह गई है?

स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आ रहा है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अब भी सीमित है। समय पर जांच नहीं होना, पोषण की कमी और जागरूकता का अभाव भी बड़ी वजह बन रहे हैं। अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी हकीकत को सुधारने के लिए ठोस और सख्त कदम उठाए। वरना योजनाएं सिर्फ कागजों में ही चलती रहेंगी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य लगातार खतरे में बना रहेगा।

इनका कहना है….

गर्भवती महिलाओं के हाई रिस्क में आने के कई कारण है। एक भी परेशानी आती है तो महिला को हाई रिस्क की श्रेणी में रखा जाता है।

डॉ मनोज हुरमाड़े सीएमएचओ बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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