Betul Samachar: घटिया सरकारी ट्राइसाइकिल की गुणवत्ता पर सवालिया निशान!

सारणी के दिव्यांग की मौत पर कटघरे में आधिकारी, बैटरी ब्लास्ट से जिंदा जले युवक को लेकर सिस्टम की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
Betul Samachar: बैतूल। शुक्रवार शाम सारनी नगर के व्यस्ततम चौक के पास शुक्रवार शाम करीब 8 बजे एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने इंसानियत और सरकारी व्यवस्थाओं दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। दिव्यांगजनों की सहायता के नाम पर दी गई तीन पहिया बैटरी चालित ट्राइसाइकिल की बैटरी में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। देखते ही देखते ट्राइसाइकिल आग के गोले में तब्दील हो गई और उस पर सवार दिव्यांग युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

हादसे में मृतक की पहचान सुनील कुमार लोखंडे (गुड्डू), पिता बलीराम लोखंडे के रूप में हुई है। सुनील शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद आत्मनिर्भर जीवन जी रहा था। वह बच्चों को पढ़ाने का काम करता था और उसी ट्राइसाइकिल के सहारे रोज़मर्रा की आवाजाही करता था, लेकिन सरकारी योजना के नाम पर दी गई एक घटिया मशीन उसकी मौत का कारण बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चलते-चलते ट्राइसाइकिल की बैटरी में अचानक धमाके जैसी आवाज हुई और आग की लपटें उठने लगीं। आग इतनी तेज थी कि सुनील को संभलने या उतरने तक का मौका नहीं मिला। पास ही मौजूद दुकानदार बिल्लू जगदेव ने साहस दिखाते हुए पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुनील आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया और मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पूरे शहर में इस हादसे के बाद शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ट्राइसाइकिल नगर पालिका या किसी सरकारी दिव्यांग सहायता योजना के तहत दी गई थी।
अगर यह सच है, तो सवाल बेहद गंभीर हैं, क्या बैटरी और वाहन की गुणवत्ता की कोई जांच हुई थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? दिव्यांगों को जानलेवा उपकरण थमाने का जिम्मेदार कौन है? यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण है। लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभी दिव्यांग ट्राइसाइकिलों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। अगर अब भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंदे रखीं, तो अगला शिकार कोई और मजबूर दिव्यांग होगा।
सोशल मीडिया पर दिखा आक्रोश, एक करोड़ मुआवजे की मांग
इस दर्दनाक घटना पर पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिले के सारनी में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत प्रदत्त इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल में ब्लास्ट से एक दिव्यांग युवक सुनील कुमार लोखंडे की मृत्यु की खबर अत्यंत हृदय विदारक और झकझोर देने वाली है। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि गरीब और दिव्यांगों की सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को इस अपार दु:ख को सहन करने की शक्ति दें।
मैं सरकार से स्पष्ट और ठोस मांग करता हूं कि मृतक सुनील कुमार लोखंडे के परिजनों को 1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। सारणी क्षेत्र के कांग्रेस नेता भूषण कांति ने कहा कि, इस घटना की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोहराई न जाएँ। गरीब और दिव्यांगों की जि़ंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्याय मिलना ही चाहिए । उनके अलावा सारणी क्षेत्र के कई राजनीतिक दल के पदाधिकारियों और जागरूक लोगों ने भी ट्रायसाइकिल की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर प्रशासन से जांच की मांग की है।




