Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: कौनसे 2 थानेदार सरकारी आवास की खम्भा पार्टी के गवाह बने?? साहब की जबरदस्त एंट्री से किन लापरवाहों की पतलून हुई गीली??? इन थाना प्रभारी के सिर चढ़ कर कैसे बोल रहा ‘अमित’ प्रेम????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….

सरकारी आवास की खम्भा पार्टी के गवाह बने दो थानेदार
शनिवार की रात लाइन के एक सरकारी आवास में ऐसा रणनीतिक मंथन चला कि खम्भा भी गवाह बन गया। दो थाना प्रभारी साहबान, खम्भे का सहारा लिए, घंटों तक गहरी चर्चा में डूबे रहे। माहौल इतना गंभीर था कि बीच-बीच में ब्लैक डॉग के पैग से विचारों को धार दी जाती रही और पुराने कारनामों की दुल्हदे सुनाकर ऊर्जा भी बनी रही। चर्चा हैं कि बैठक में तीन आरक्षक पूरी मुस्तैदी से सेवा में तैनात थे। कभी गिलास संभालते, तो कभी माहौल।
बाहर से यह महज एक सामान्य शाम लग रही थी, लेकिन अंदर खाकी के भविष्य की पटकथा लिखी जा रही थी। चर्चा यह भी हैं कि दोनों ही साहबों की नजर एक ही पवित्र नगरी पर टिकी हुई है। कुर्सी वही, दावेदार दो तो फिर रणनीति तो बननी ही थी। तय यह हुआ कि जो पहले अपनी जमीन मजबूत कर लेगा, वही वहां की रवानगी लेगा। और हां, अगर रास्ता सीधा न मिला, तो टेढ़े रास्तों पर भी विचार हुआ।
यहां तक कि ‘गिर सक्सेना टाइपÓ प्रदर्शन तक की रूपरेखा पर हंसी-ठिठोली के बीच गंभीर चर्चा हो गई। जरूरत पड़ी तो मंचन भी किया जाएगा, और स्क्रिप्ट भी मिलकर लिखी जाएगी। ब खाकी गलियारों में यह चर्चा चटकारे लेकर सुनी जा रही है कि यह ‘खम्भा मीटिंगÓ कब रंग लाएगी। कौन साहब पहले बाजी मारेंगे, और कौन पीछे छूट जाएगायह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल इस बैठक ने विभागीय गपशप को नया मसाला जरूर दे दिया है।
साहब की एंट्री और लापरवाहों की पतलून ढीली
जिले के एक निकाय में नए साहब की एंट्री को अभी चंद दिन ही हुए हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली ने पूरे दफ्तर का तापमान बदल दिया है। तेजतर्रार अंदाज़ और ‘पावरप्लेÓ वाली सक्रियता से साहब ने आते ही यह जता दिया कि अब खेल पुराने तरीके से नहीं चलेगा।
काम करने वालों की पीठ थपथपाने में साहब बिल्कुल कंजूसी नहीं कर रहे, तो दूसरी तरफ लापरवाहों की खबर लेने में भी कोई नरमी नहीं दिखा रहे। नतीजा यह हुआ कि जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं, वे राहत की सांस ले रहे हैं और जो फाइलों में धूल जमा रहे थे, उनकी बेचैनी बढ़ गई है। इसी बीच, निकाय की एक ऐसी शाखा पर साहब की नजर पड़ी, जहां ‘कचराÓ सिर्फ फाइलों में ही नहीं, चर्चाओं में भी सबसे ज्यादा था। बस फिर क्या था, शाखा प्रभारी को साहब ने ऐसी ‘क्लासÓ ली कि पूरे दफ्तर में गूंज सुनाई दी।
प्रभारी ने बीमारी का सहारा लेकर बचने की कोशिश की, लेकिन साहब के तेवर ठंडे पड़ने वाले नहीं थे। चर्चा है कि साहब ने दो टूक कह दिया कि व्यवस्था सुधारो, नहीं तो मरघट तक छोड़ने भी हम ही जाएंगे। यह सुनते ही प्रभारी को जैसे सांप सूंघ गया। जो अब तक बहानों के सहारे चल रहे थे, वे अचानक खामोश हो गए। अब हाल यह है कि वही प्रभारी दफ्तर के कोनों में अपने साथियों को यह किस्सा सुना रहे हैं और साथ ही ‘दूसरी जगह तबादलेÓ की संभावनाएं भी टटोलते नजर आ रहे हैं। उधर, साहब के सख्त तेवर ने यह साफ कर दिया है कि इस निकाय में अब या तो काम चलेगा… या फिर बहाने नहीं चलेंगे।
थाना प्रभारी का कैसा अमित प्रेम
इन दिनों खाकी गलियारों में एक प्यारे चेहरे की चर्चा कुछ ज्यादा ही गरम है। कहा जा रहा है कि एक थानेदार साहब के बेहद खास यह जनाब न केवल उनके चेंबर में बेधड़क आवाजाही रखते हैं, बल्कि साहब के बंगले तक भी उनकी पहुंच किसी अपने से कम नहीं मानी जाती। अब यह अपनापन है या ‘व्यवस्था ‘, इस पर हर कोई अपनी-अपनी समझ के हिसाब से मुस्कुरा रहा है।
गपशप के शौकीनों का कहना है कि इस शख्स अमित का नाम एक विधानसभा में कुछ चर्चित गतिविधियों से भी जोड़ा जाता रहा है। मगर खाकी गलियारों का उसूल है कि जो दिखता है, वही सच नहीं होता… और जो सच होता है, वह अक्सर दिखता नहीं। मामले में नया मोड़ तब आया, जब इस क्षेत्र के बस स्टैंड पर लाल बुलेट की सवारी करने वाले एक चर्चित ‘टोपीबाजÓ कुशवाह जी ने खुलेआम इस रिश्ते पर चुटकी ले डाली।
उनकी यह सार्वजनिक टिप्पणी अब चाय की दुकानों से लेकर दफ्तरों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि कुशवाह जी को खुद ’52 पत्तों वाले खेलÓ की पूरी जिम्मेदारी सौंप रखी है और ऐसे में उनका यह बयान महज बयान नहीं, बल्कि एक इशारा भी माना जा रहा है। बताते चले कि यह मामला जिले के एक अनारक्षित विधानसभा मुख्यालय से जुड़ा है।




