Betul Ki Khabar: स्कैनिंग में फंसा राजस्व रिकॉर्ड, आदेश अटके

अभिलेख दुरुस्ती, विक्रय अनुमति और भूमि बंधक जैसे मामलों का निराकरण प्रभावित
Betul Ki Khabar: बैतूल। मध्यप्रदेश शासन द्वारा राजस्व विभाग के अभिलेखों को डिजिटल और ऑनलाइन करने के उद्देश्य से शुरू की गई रिकॉर्ड स्कैनिंग की प्रक्रिया बैतूल जिले में धीमी गति से चल रही है। लगभग छह माह बीत जाने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिसके कारण राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों का निराकरण प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि जिले की सभी तहसीलों से पुराने राजस्व अभिलेख स्कैनिंग के लिए जिला मुख्यालय बैतूल भेज दिए गए हैं, इससे तहसील कार्यालयों में आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते किसानों, आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिलेख दुरुस्ती, विक्रय अनुमति, भूमि बंधक, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी मामलों में आदेश पारित नहीं हो पा रहे हैं। कई प्रकरण राजस्व न्यायालयों में लंबित पड़े हुए हैं और संबंधित पक्षों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों ही खर्च हो रहा है।
6 माह से लंबित किसान का प्रकरण
तहसील घोड़ाडोंगरी के ग्राम हीरावाड़ी निवासी किसान महेश पिता दशन उपरॉले ने बताया कि उनका अभिलेख दुरुस्ती से संबंधित मामला अनुविभागीय अधिकारी शाहपुर के समक्ष करीब छह माह से लंबित है। संबंधित राजस्व रिकॉर्ड स्कैनिंग के लिए बैतूल भेज दिया गया है, जिसके वापस आने का इंतजार किया जा रहा है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके मामले में अब तक कोई आदेश पारित नहीं हो पाया है।
तहसील स्तर पर स्कैनिंग की नहीं सुविधा
इस संबंध में अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड की स्कैनिंग का कार्य तहसील स्तर पर ही कराया जाता और तहसीलदार की निगरानी में इसे पूरा किया जाता, तो यह प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो सकती थी। सभी तहसीलों का रिकॉर्ड एक साथ जिला मुख्यालय भेजे जाने के कारण आवश्यक फाइलें लंबे समय तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे राजस्व मामलों के निराकरण में अनावश्यक देरी हो रही है।
रिकॉर्ड इधर-उधर भेजने से बढ़ा खर्च
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने राजस्व अभिलेख पहले जिला मुख्यालय में सुरक्षित रखे जाते थे। बाद में इन्हें तहसीलों में भेजा गया और अब स्कैनिंग के नाम पर इन्हें फिर से तहसीलों से जिला मुख्यालय मंगाया गया है। रिकॉर्ड को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के कारण न केवल काम में देरी हुई है बल्कि शासन पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी बढ़ा है।
आंदोलन की चेतावनी
आम आदमी पार्टी के नेता सपन कमला ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड स्कैनिंग की योजना लोगों की सुविधा के लिए शुरू की गई थी, लेकिन बैतूल जिले में यह व्यवस्था उल्टा परेशानी का कारण बन गई है। उन्होंने कहा कि छह माह बाद भी कार्य पूरा नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की है कि स्कैनिंग कार्य में तेजी लाई जाए और लंबित राजस्व प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए, अन्यथा आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।




